प्रदूषण पर प्रहार: दिल्ली में 1 नवंबर 2026 से BS-IV कमर्शियल वाहनों की एंट्री बैन

राजधानी दिल्ली की हवा को जहरीला होने से बचाने के लिए सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब 1 नवंबर 2026 से दिल्ली की सड़कों पर दिल्ली BS-IV वाहन प्रतिबंध लागू हो जाएगा। इसके तहत BS-IV और उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले कमर्शियल मालवाहक वाहनों और बसों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। यह कदम 'वायु प्रदूषण शमन कार्य योजना 2026' का हिस्सा है, जिसका मकसद शहर में प्रदूषण के स्तर को कम करना और लोगों को स्वच्छ हवा देना है।
नए नियमों के मुताबिक, अब दिल्ली की सीमा में केवल इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सीएनजी (CNG) और BS-VI मानकों को पूरा करने वाले कमर्शियल वाहन ही प्रवेश कर सकेंगे। जो वाहन दिल्ली के बाहर पंजीकृत हैं और BS-IV श्रेणी में आते हैं, उनके लिए मोहलत 31 अक्टूबर 2026 तक ही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ किया है कि यह अभियान पूरी तरह से सख्ती और प्रवर्तन पर आधारित होगा ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
NCR में सख्ती और नए उत्सर्जन मानक
इस पूरी योजना को अंतिम रूप देने के लिए पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा और PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। CAQM ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि NCR के सभी राज्यों को प्रदूषण से निपटने के लिए वार्षिक कार्य योजनाएं बनानी और लागू करनी होंगी।
इसी कड़ी में पड़ोसी शहर गुरुग्राम में भी बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। वहां के रोड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) ने 13,426 ओवरएज वाहनों की पहचान की है। इन वाहनों के मालिकों को एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया गया है कि वे या तो इन गाड़ियों को NCR से बाहर ले जाएं या अधिकृत केंद्रों पर स्क्रैप करा दें। हरियाणा सरकार ने भी पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों को स्क्रैप करने पर नए वाहनों की खरीद में छूट देने का लालच दिया है, जिसके तहत करीब 17.5 लाख वाहनों को हटाने का लक्ष्य है।
वहीं, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस भी एक्शन मोड में है, जिसने हाल ही में त्योहारों की तैयारियों के बीच एक हफ्ते में 81,000 से ज्यादा चालान काटे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी तैयारी तेज है; सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRशन) ने BS-VII उत्सर्जन मानकों का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। ये नए और सख्त मानक अप्रैल 2029 से पैसेंजर वाहनों और अप्रैल 2030 से मालवाहक वाहनों के लिए लागू करने का प्रस्ताव है।