Delhi Assembly ने पास किया नया Bill, तय समय पर सरकारी Services न देने पर अधिकारियों पर लगेगा Fine

दिल्ली विधानसभा ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को 'दिल्ली (राइट ऑफ सिटीजंस टू टाइम-बाउंड एंड इजी डिलीवरी ऑफ सर्विसेज) बिल, 2026' पास कर दिया है। यह नया कानून साल 2011 के पुराने दिल्ली राइट टू टाइमली सर्विस डिलीवरी एक्ट की जगह लेगा। इस नए कानून का उद्देश्य दिल्ली के नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं पारदर्शी, समय पर और बिना किसी परेशानी के उपलब्ध कराना है। इस बिल को दिल्ली कैबिनेट ने 14 जुलाई 2026 को मंजूरी दी थी, जिसके बाद इसे 10 अगस्त 2026 को विधानसभा में पेश किया गया था।
इस खबर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- दिल्ली विधानसभा ने 11 अगस्त 2026 को नया सर्विस डिलीवरी बिल पास किया।
- नागरिकों को 500 से अधिक सरकारी सेवाएं तय समय सीमा में मिलेंगी।
- काम में देरी करने वाले अधिकारियों पर प्रतिदिन ₹250 का जुर्माना लगेगा, जो अधिकतम ₹5,000 तक होगा।
- शिकायतों के समाधान के लिए 'दिल्ली राइट टू सर्विसेज Commission' बनाया जाएगा।
नया कानून और नागरिकों के अधिकार
इस नए कानून के तहत दिल्ली के नागरिकों को एक तय समय सीमा के भीतर 500 से अधिक सरकारी सेवाएं पाने का कानूनी अधिकार मिल गया है। पारदर्शिता और आसानी को बढ़ाने के लिए, हर एप्लीकेशन को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा, जिससे नागरिक घर बैठे ऑनलाइन स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे। यदि तय समय के भीतर सेवाएं नहीं दी जाती हैं, तो एप्लीकेशन अपने आप सीनियर ऑफिसर के पास चली जाएगी। जो अधिकारी देरी के लिए या एप्लीकेशन को गलत तरीके से खारिज करने के लिए जिम्मेदार पाए जाएंगे, उन पर प्रतिदिन ₹250 का जुर्माना लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹5,000 होगी।
Commission का गठन और दायरा
सभी गतिविधियों की निगरानी करने और शिकायतों को हल करने के लिए एक स्वतंत्र 'दिल्ली राइट टू सर्विसेज Commission' बनाया जाएगा। इस कानून का दायरा पूरे नेशनल कैपिटल टेरिटरी में लागू होगा। इसमें दिल्ली सरकार के कर्मचारियों, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, NDMC, दिल्ली Cantonment बोर्ड, दिल्ली जल बोर्ड, DDA और अन्य अधिसूचित लोकल बॉडीज द्वारा दी जाने वाली सेवाएं शामिल हैं। दिल्ली के हेल्थ, ट्रांसपोर्ट और IT मिनिस्टर, डॉ. पंकज कुमार सिंह, जिन्होंने इस बिल को पेश किया था, ने इसे देरी और जवाबदेही की कमी को खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।