यमुना में विसर्जन बैन: दिल्ली सरकार ने बनाए 81 कृत्रिम तालाब, नियमों की अनदेखी पर लगेगा भारी जुर्माना

दिल्ली में दुर्गा पूजा के समापन के बाद मूर्ति विसर्जन को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है। यमुना नदी और अन्य प्राकृतिक जल निकायों को प्रदूषण से बचाने के लिए दिल्ली सरकार ने पूरे शहर में दुर्गा मूर्ति विसर्जन कृत्रिम तालाब तैयार किए हैं। कुल 81 कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को विसर्जन के लिए सुरक्षित और निर्धारित विकल्प मिल सकें। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने यमुना में विसर्जन पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जो भी व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्रों या यमुना में मूर्ति विसर्जित करता पाया जाएगा, उस पर 50,000 रुपये का भारी पर्यावरणीय मुआवजा जुर्माना लगाया जाएगा। विसर्जन की प्रक्रिया 21 अक्टूबर, 2026 को होगी, जिसके लिए सुबह 06:25:16 से 08:41:25 तक का शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया है।
विसर्जन के कड़े नियम और ट्रैफिक एडवाइजरी
सरकार ने इस बार पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया है। विसर्जन के लिए केवल प्राकृतिक मिट्टी और बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बनी मूर्तियों की ही अनुमति होगी, जबकि प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। श्रद्धालुओं को निर्देश दिया गया है कि वे विसर्जन से पहले फूलों और पूजा सामग्री को अलग कर लें। पूजा सामग्री, भोजन और तेल को सीधे यमुना में डालना वर्जित है। इसके लिए सरकार ने 110 'विसर्जन पात्र' संग्रह केंद्र भी स्थापित किए हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है। पुलिस आने वाले वाहनों की जांच करेगी ताकि प्रतिबंधित मूर्तियों के परिवहन को रोका जा सके और अवैध विनिर्माण इकाइयों पर कार्रवाई की जा सके। वहीं, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के कृत्रिम तालाबों के पास ट्रैफिक जाम की संभावना जताई है और लोगों को एडवाइजरी जारी की है।
DPCC ने जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 33A के तहत यह निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घर पर या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के परिसरों में बाल्टियों या अस्थायी सुविधाओं का उपयोग कर छोटे स्तर पर विसर्जन करने पर विचार करें।