दिल्ली में AQI 164 पर पहुंचा, हवा में मामूली सुधार लेकिन यमुना में फिर दिखा जहरीला झाग
दिल्ली की हवा में मामूली सुधार के साथ AQI 164 दर्ज किया गया, लेकिन यमुना नदी में फिर से जहरीला सफेद झाग नजर आया है।

देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार सुबह हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार देखने को मिला है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार सुबह 7 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 164 दर्ज किया गया, जिससे शहर 'मध्यम' (Moderate) श्रेणी में बना हुआ है। हालांकि, शहर के कुछ हिस्सों में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है और यमुना नदी में प्रदूषण का एक और डराने वाला रूप सामने आया है।
शहर के 60 में से 55 निगरानी केंद्रों से मिले आंकड़ों के अनुसार, जहांगीरपुरी में सबसे खराब स्थिति रही जहां AQI 246 तक पहुंच गया। इसके अलावा विवेक विहार (235), सीआरआरआई मथुरा रोड (231), पंजाबी बाग (225) और आर के पुरम (223) में भी हवा की गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में रही। इन इलाकों में मुख्य रूप से PM2.5 प्रदूषक के रूप में पाया गया, जबकि मथुरा रोड पर PM10 का असर ज्यादा देखा गया। वहीं, श्रीनिवासपुरी के पीजीडीएवी कॉलेज जैसे इलाकों में AQI 110 के आसपास दर्ज किया गया, जो तुलनात्मक रूप से बेहतर है।
यमुना में सफेद झाग और GRAP-1 का असर
एक तरफ जहां हवा में मामूली सुधार हुआ है, वहीं दूसरी तरफ कालिंदी कुंज के पास यमुना नदी में एक बार फिर जहरीला सफेद झाग तैरता नजर आया है। नदी की सतह पर जमी इस झाग की मोटी परत पर्यावरण के लिए गंभीर खतरे की ओर इशारा कर रही है। यह स्थिति तब सामने आई है जब हाल ही में नदी के पुनरुद्धार के लिए करीब 9,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की तारीफ की गई थी।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर से ही दिल्ली-NCR में 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के पहले चरण (Stage 1) को लागू कर दिया है। इस योजना के तहत कई कड़े कदम उठाए गए हैं:
- होटलों, रेस्टोरेंट और खुले ढाबों के तंदूरों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को केवल जरूरी या आपातकालीन कार्यों तक ही सीमित कर दिया गया है।
कुल मिलाकर, दिल्ली इस समय दोहरी मार झेल रही है—एक तरफ हवा में घुलता प्रदूषण और दूसरी तरफ यमुना का जहरीला होता पानी। प्रशासन की कोशिशों के बावजूद प्रदूषण का स्तर अब भी कई इलाकों में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बना हुआ है।