दिल्ली में AQI 377 पहुंचा, पंजाब में पराली जलाने पर CAQM की बड़ी कार्रवाई
दिल्ली में AQI 377 के पार, 288 दिनों का सबसे खराब स्तर। CAQM ने पंजाब के अधिकारियों को नोटिस जारी कर सख्ती की।

राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। बुधवार, 4 नवंबर 2026 को दिल्ली का 24 घंटे का औसत दिल्ली वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 377 दर्ज किया गया, जो पिछले 288 दिनों का सबसे उच्चतम स्तर है। इससे पहले जनवरी 2026 में प्रदूषण का स्तर 378 तक गया था। शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थिति काफी चिंताजनक है, जहां 22 मॉनिटरिंग स्टेशनों ने 'गंभीर' श्रेणी में वायु गुणवत्ता दर्ज की है।
प्रदूषण के आंकड़ों पर नजर डालें तो IIT दिल्ली में AQI 458 तक पहुंच गया, जबकि जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में यह 448 और मुंडका में 439 दर्ज किया गया। इस बदतर स्थिति का सबसे बड़ा कारण पराली जलाना बताया जा रहा है, जिसका योगदान कुल प्रदूषण में 20.2% है। इसके बाद परिवहन उत्सर्जन 15.5% के साथ दूसरे स्थान पर है।
पंजाब के अधिकारियों को नोटिस, हरियाणा मॉडल अपनाने की सलाह
हवा की गिरती गुणवत्ता को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने अब कड़ा रुख अपनाया है। पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए CAQM ने नौ जिलों के उपायुक्तों (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इनमें गुरदासपुर, कपूरथला, अमृतसर, तरनतारन, जालंधर, फरीदकोट, बठिंडा, बरनाला और फाजिल्का जैसे जिले शामिल हैं। इन अधिकारियों को 6 नवंबर तक अपना जवाब देना होगा।
CAQM के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने पंजाब के 12 जिलों के नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। उन्होंने नोडल अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और निगरानी बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए। आयोग ने हरियाणा की रणनीति को एक मॉडल के रूप में पेश किया और पंजाब से आग्रह किया कि वह पराली के प्रबंधन के लिए 'एक्स-सीटू' समाधानों, जैसे बॉयलर में पुआल के उपयोग को प्राथमिकता दे।
आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से अब तक सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 4,800 मामले पराली जलाने के मिले हैं, जिनमें से अकेले पंजाब में 2,347 मामले दर्ज किए गए हैं, जो कुल घटनाओं का लगभग 49% है। हालांकि, हालिया आंकड़ों में कुछ गिरावट दिखी है; 3 नवंबर को जहां 584 मामले थे, वहीं 4 नवंबर को यह घटकर 151 रह गए हैं।