दिल्ली में बिगड़ रही हवा, AQI 200 के करीब पहुँचते ही लागू होगा GRAP-1

राजधानी दिल्ली में मौसम के बदलते मिजाज के साथ हवा की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है। 4 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, शहर के कई इलाकों में दिल्ली एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 195 से 198 के बीच पहुंच गया है। स्थिति यह है कि अगर AQI 200 के आंकड़े को पार करता है, तो प्रशासन तुरंत 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के पहले चरण (Stage-1) को लागू कर देगा।
बढ़ते तापमान और बदलते मौसम ने प्रदूषण के स्तर को ऊपर धकेल दिया है। हालांकि कुछ इलाकों में आंकड़े अलग-अलग हैं, लेकिन समग्र स्थिति चिंताजनक है। गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में 1 अक्टूबर 2026 से संशोधित GRAP नियम लागू हो चुके हैं। अब अधिकारियों के पास यह शक्ति है कि वे केवल वर्तमान स्तर का इंतजार न करें, बल्कि पूर्वानुमान (Forecast) के आधार पर भी पाबंदियां लगा सकें।
प्रदूषण रोकने के लिए कड़े नियम और निगरानी
नए नियमों के तहत चार चरणों वाला ढांचा तैयार किया गया है। स्टेज-1 तब सक्रिय होता है जब AQI 201 से 300 के बीच होता है। इसके बाद स्टेज-2 (301-400), स्टेज-3 (401-450) और स्टेज-4 (450 से ऊपर) की श्रेणियां आती हैं। स्टेज-1 के तहत कुल 25 एक्शन पॉइंट्स निर्धारित किए गए हैं, जिसकी निगरानी कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) कर रही है।
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अब तकनीक का सहारा लिया है। मुख्य कदम इस प्रकार हैं:
- कड़ी निगरानी: निर्माण स्थलों की 24 घंटे निगरानी के लिए AI और CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- अधिकारियों की जवाबदेही: DPCC के अधिकारियों को ड्यूटी के दौरान बॉडी कैमरा पहनना अनिवार्य किया गया है।
- वाहन नियंत्रण: ईंधन स्टेशनों पर PUC चेक अनिवार्य है, जिसके लिए ऑटोमेटेड रीडर्स और कैमरों का उपयोग हो रहा है। साथ ही, 1 नवंबर 2025 से केवल CNG, LNG और इलेक्ट्रिक भारी वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश की अनुमति है।
प्रशासन की सख्ती का असर औद्योगिक इकाइयों पर भी दिख रहा है। 30 सितंबर 2026 तक कुल 28,744 औद्योगिक यूनिट्स की जांच की गई, जिसमें दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई रेस्टोरेशन ऑर्डर जारी किए गए। वहीं, पड़ोसी शहर गुरुग्राम में स्थिति और भी गंभीर है, जहां AQI पहले ही 204 तक पहुंच चुका है।