प्रदूषण से जंग: दिल्ली में GRAP-1 लागू, सड़कों पर उतरीं एंटी-स्मॉग गन

दिल्ली सरकार ने GRAP-1 के तहत प्रदूषण कम करने के लिए एंटी-स्मॉग गन तैनात की हैं। जानें क्या है पूरी योजना और चुनौतियां।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
प्रदूषण से जंग: दिल्ली में GRAP-1 लागू, सड़कों पर उतरीं एंटी-स्मॉग गन

राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए सरकार ने कमर कस ली है। नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में 21 अक्टूबर 2026 से ग्रेडिएंट रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-1) के पहले चरण को लागू कर दिया गया है। इसी कड़ी में शहर की हवा को साफ रखने और धूल के कणों को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर दिल्ली एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में NDMC इलाके में इन मशीनों और वॉटर मिस्ट सिस्टम का निरीक्षण किया। सरकार ने अब एक सख्त निर्देश जारी किया है कि शहर की सभी निजी और सरकारी इमारतें, जिनकी ऊंचाई 5 मंजिल (G+5) से अधिक है, वहां एंटी-स्मॉग गन लगाना अनिवार्य होगा। इसमें मॉल, होटल, ऑफिस और शिक्षण संस्थान भी शामिल हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के मुताबिक, सरकार साल में करीब 10 महीने इन मशीनों को चलाने की योजना बना रही है, जिसके लिए 1,100 से अधिक यूनिट्स किराए पर लेने के लिए 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया जाएगा।

संसाधनों की तैनाती और बड़ी चुनौतियां

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वर्तमान में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अलग-अलग एजेंसियां अपनी क्षमताएं लगा रही हैं। नगर निगम (MCD) ने 40 एंटी-स्मॉग गन और 167 वॉटर स्प्रिंकलर तैनात किए हैं। वहीं, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) 14 एंटी-स्मॉग गन, 60 स्प्रिंकलर, 23 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें और 900 से अधिक कर्मियों के साथ काम कर रहा है।

हालांकि, इन मशीनों के संचालन में पानी की भारी किल्लत एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। अगर 250 से 600 गन एक साथ चलाई जाती हैं, तो रोजाना 25 लाख से 90 लाख लीटर पानी की जरूरत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ये गन केवल धूल को दबाने में मददगार हैं, लेकिन ये प्रदूषण के मुख्य कारणों जैसे खराब सड़कें, निर्माण नियमों का उल्लंघन और साफ-सफाई की कमी का स्थायी समाधान नहीं हैं।

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार 1 नवंबर 2026 से BS-4 से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों पर पाबंदी लगाने और 'नो PUC, नो फ्यूल' नीति को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है। हालांकि, ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (AIMGTA) ने इन प्रतिबंधों से पहले 15 दिनों के पायलट प्रोजेक्ट की मांग की है। राहत की बात यह है कि 26 अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अक्टूबर में प्रदूषण का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में कम दर्ज किया गया है।

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