प्रदूषण पर वार: दिल्ली सरकार का 104 करोड़ का मास्टर प्लान, मंत्री सिरसा ने किया औचक निरीक्षण

राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 104 करोड़ रुपये का एक बड़ा पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। इसी कड़ी में पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के विभिन्न इलाकों का औचक निरीक्षण किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन हो रहा है या नहीं।
निरीक्षण के दौरान मंत्री सिरसा ने ऊंची इमारतों में लगे एंटी-स्मॉग गन और वॉटर मिस्ट सिस्टम की कार्यप्रणाली को करीब से देखा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो संस्थान पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नियमों के मुताबिक, 3,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली या G+5 मंजिल से ऊंची कमर्शियल, इंस्टीट्यूशनल और हॉस्पिटैलिटी इमारतों के लिए डस्ट कंट्रोल उपाय करना अनिवार्य है।
प्रदूषण घटाने के लिए हाई-टेक तकनीक का सहारा
दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किए गए 104 करोड़ रुपये के इस नए पायलट प्रोजेक्ट के तहत शहर के 40 रणनीतिक स्थानों पर अत्याधुनिक प्रदूषण नियंत्रण तकनीक तैनात की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य PM10 और PM2.5 के स्तर में 20% तक की कमी लाना है।
इसके साथ ही, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के बाद एमसीडी को 31 अक्टूबर तक सार्वजनिक स्थानों से निर्माण मलबे, कूड़े और धूल को पूरी तरह साफ करने का आदेश दिया गया है। सरकार अन्य कड़े कदम भी उठा रही है, जिनमें शामिल हैं:
- NCR के 500 से अधिक पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने के लिए वैध PUC सर्टिफिकेट की अनिवार्यता।
- सदरपुर और करावल नगर जैसे इलाकों में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को सील करने की कार्रवाई।
जैसे-जैसे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'खराब' और 'गंभीर' श्रेणी की ओर बढ़ रहा है, प्रशासन अब समय रहते इन उपायों के जरिए प्रदूषण के seasonal उछाल को रोकने की कोशिश कर रहा है।