दिल्ली में प्रदूषण पर सख्त एक्शन: GRAP-I लागू, अब रोजाना कट रहे हजारों चालान
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए GRAP-I लागू किया है। अब बिना PUC के नहीं मिलेगा पेट्रोल और हजारों चालान काटे जा रहे हैं।

राजधानी दिल्ली में सर्दियों की दस्तक के साथ ही हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है, जिसे देखते हुए सरकार ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण उपाय को बेहद सख्त कर दिया है। शहर में अब ट्रैफिक नियमों और उत्सर्जन मानकों की अनदेखी करने वालों की खैर नहीं है। हाल ही में 24 अक्टूबर को एक ही दिन में 9,883 वाहनों के चालान काटे गए, जो यह साफ संकेत है कि प्रशासन अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने एनसीआर के पड़ोसी जिलों के परिवहन अधिकारियों और ट्रैफिक पुलिस के साथ एक वर्चुअल मीटिंग की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ट्रैफिक जाम को कम करना और उन वाहनों पर लगाम लगाना था जो भारी मात्रा में प्रदूषण फैला रहे हैं। गौरतलब है कि 21 अक्टूबर 2026 से ही दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण (Stage I) को लागू कर दिया गया है।
विंटर एक्शन प्लान: 1 नवंबर से बदल जाएंगे नियम
सरकार ने 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक के लिए एक व्यापक 'विंटर एक्शन प्लान' तैयार किया है। इस प्लान के तहत कई कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, जो आम जनता और वाहन मालिकों को सीधे प्रभावित करेंगे:
- नो PUC, नो फ्यूल: शहर के 500 पेट्रोल पंपों पर ANPR सिस्टम लगाया जाएगा। अगर आपके वाहन का PUC सर्टिफिकेट नहीं है, तो आपको ईंधन नहीं दिया जाएगा।
- वाहनों पर पाबंदी: दिल्ली के बाहर से आने वाले ऐसे वाहन जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते, उनकी एंट्री पर रोक होगी।
- वर्क फ्रॉम होम: सरकारी और निजी क्षेत्रों में 50% कर्मचारियों के लिए वर्क-from-home अनिवार्य किया जाएगा।
- निर्माण कार्य पर रोक: 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। साथ ही सभी साइट्स को 'मलबा ऐप' पर रजिस्टर करना होगा।
मंत्री सिरसा ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की पहचान करें और सड़कों की धूल, अवैध अतिक्रमण, अनधिकृत पार्किंग और कचरा जलाने जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करें। हालांकि, दिल्ली के लिए राहत की बात यह है कि इस सीजन में अब तक 214 दिन हवा साफ रही है, जो कोविड काल को छोड़कर पिछले एक दशक का सबसे बेहतर आंकड़ा है।