दिल्ली के अली गांव में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की तरफ से करीब 1,800 मकान मालिकों और दुकानदारों कोखाली करने का नोटिस दिया गया है। इन सभी संपत्तियों को 26 सितंबर 2026 तक खाली करने का सख्त आदेश दिया गया है। यह पूरा मामला करीब 8.48 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है जिस पर विभाग का मालिकाना हक है।तय समय सीमा खत्म होने के बाद 27 सितंबर 2026 से पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
यह पूरी कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के बाद हो रही है जो उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पक्ष में आया था। साकेत जिला कोर्ट के आदेश के बाद कोर्ट द्वारा नियुक्त बेलीफ ने इन
नोटिसों को संपत्तियों पर चस्पा कर दिया है। अली चौक से शिव मंदिर तक पुश्ता रोड पर करीब 1,500 संरचनाएं और पीर मोहल्ला में लगभग 300 संरचनाएं इस दायरे में आती हैं। इस पूरी कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने
कार्यकारी अभियंता बी.के. सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
अचानक मिले इस निर्देश के बाद से स्थानीय लोगों ने
भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। हालांकि कुछ लोगों ने 25 सितंबर 2026 को अपना सामान हटाना शुरू कर दिया था, लेकिन कई अन्य लोगों ने इस कदम को चुनौती दी है।
रहवासियों का दावा है कि वे इस जमीन पर 60 से 70 साल से रह रहे हैं और उनके पास मालिकाना हक के दस्तावेज भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने जमीन पर कब्जा नहीं किया बल्कि उन्हें यह विरासत में मिली है। कुछ लोगों ने नोटिस पर आधिकारिक हस्ताक्षर न होने का हवाला देकर
इसकी वैधता पर सवाल भी उठाए हैं।
22 और 23 सितंबर 2026 को प्रारंभिक बुलडोजर कार्रवाई के दौरान
तनाव काफी बढ़ गया था। इस दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच तीखी झड़पें हुईं और महिला पत्रकारों को कवरेज करने से रोकने की घटनाएं भी सामने आईं। यह मामला तब और चर्चा में आया जब यह पता चला कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर कथित रूप से कब्जा करने वाले कुछ लोगों के नाम
आधिकारिक मतदाता सूचियों में भी दर्ज हैं।