दिल्ली एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक का बदला मिजाज, US वीजा नियमों और वैश्विक तनाव का असर

इन्दिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की आवाजाही के पैटर्न में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र (airspace) में मची उथल-पुथल और अमेरिका की बदलती वीजा नीतियों ने यात्रियों के गंतव्यों को प्रभावित किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के अप्रैल से अगस्त के बीच, दिल्ली एयरपोर्ट पर कुल अंतरराष्ट्रीय यात्री ट्रैफिक में 0.8% की मामूली बढ़त देखी गई, जो कुल 86.2 लाख यात्रियों तक पहुंच गया है।
इस दौरान सबसे दिलचस्प बदलाव यह रहा कि एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या में 11.4% का जोरदार उछाल आया, जो बढ़कर 35.7 लाख हो गया। इसी ग्रोथ ने अन्य क्षेत्रों में आई गिरावट की भरपाई की। वहीं, उत्तरी अमेरिका जाने वाले यात्रियों की संख्या में 26.2% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह आंकड़ा घटकर महज 5.5 लाख रह गया। इसके अलावा मध्य पूर्व (Middle East) में 4.1% और अफ्रीका रूट पर 10.9% की कमी आई है, जबकि यूरोपीय रूट लगभग स्थिर रहे हैं।
वीजा नियमों और युद्ध जैसे हालात ने बदला रास्ता
दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के सीईओ प्रदीप पणिक्कर के मुताबिक, पश्चिम एशिया के संकट और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद रहने से विमानन सेवाओं पर असर पड़ा है। इस वजह से एमिरेट्स, इतिहाद, फ्लाईदुबई और एयर अरेबिया जैसी एयरलाइंस को अपने रूट बदलने पड़े हैं। पणिक्कर ने बताया कि उत्तरी अमेरिका की ओर जाने वाले ट्रैफिक में कमी का एक मुख्य कारण अमेरिका के सख्त वीजा नियम हैं, जिससे विशेष रूप से छात्रों और बिजनेस यात्रियों पर असर पड़ा है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने 1 अक्टूबर 2026 से I, TN और TD वीजा आवेदकों के लिए सोशल मीडिया स्क्रीनिंग को बढ़ा दिया है। साथ ही, होमलैंड सिक्योरिटी के नए प्रस्तावित नियमों के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' के लिए भारी ट्रेनिंग फीस देनी होगी। हालांकि, वीजा बॉन्ड प्रोग्राम को स्थायी कर दिया गया है, लेकिन भारत फिलहाल उन देशों की सूची में नहीं है जिन पर यह अनिवार्य है।
इन चुनौतियों के बावजूद दिल्ली एयरपोर्ट अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटा है। एयरपोर्ट का लक्ष्य 2029 तक अपनी वार्षिक यात्री क्षमता को 10.6 करोड़ से बढ़ाकर 12.5 करोड़ करना है। इसके अलावा, 3,500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला 'एयर ट्रेन' (ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर) प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा होगा, जो टर्मिनल्स और एरोसिटी के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय लगातार इन बदलते पैटर्न्स पर नजर रख रहा है।