दिल्ली एयरपोर्ट पर चलेगा ड्राइवरलेस ट्रांजिट सिस्टम, 3500 करोड़ से बदलेगी सूरत

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब एयरपोर्ट के अलग-अलग टर्मिनलों के बीच दौड़ने के लिए आपको बसों का इंतजार नहीं करना होगा। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) साल 2030 तक एक हाई-टेक दिल्ली एयरपोर्ट ड्राइवरलेस ट्रांजिट सिस्टम यानी ऑटोमेटेड पीपल मूवर (APM) शुरू करने जा रहा है।
जीएमआर एयरपोर्ट्स द्वारा प्रबंधित इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 3,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। DIAL के सीईओ प्रदीप पणिक्कर ने मंगलवार को इस योजना की जानकारी दी। इस सिस्टम का मुख्य मकसद एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे को आपस में जोड़ना और यात्रियों के अनुभव को और भी आसान बनाना है।
T1 से T3 का सफर होगा अब मिनटों में
यह ड्राइवरलेस ट्रांजिट सिस्टम कुल 7.3 किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें छह स्टेशन बनाए जाएंगे। यह सिस्टम टर्मिनल 1, टर्मिनल 2 और टर्मिनल 3 को आपस में जोड़ेगा। इतना ही नहीं, यह कार्गो टर्मिनल और एरोसिटी तक भी पहुंच प्रदान करेगा। खास बात यह है कि एक स्टेशन को सीधे दिल्ली मेट्रो लाइनों से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को काफी सुविधा होगी।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद टर्मिनल 1 और टर्मिनल 3 के बीच की दूरी महज 13 मिनट में पूरी हो जाएगी। अनुमान है कि अपने पहले साल में ही यह सिस्टम रोजाना करीब 55,000 यात्रियों को सेवा प्रदान करेगा।
इस प्रोजेक्ट के जरिए न केवल भीड़भाड़ कम होगी, बल्कि पर्यावरण का भी ख्याल रखा जाएगा। वर्तमान में चलने वाली डीजल शटल बसों की जगह यह आधुनिक सिस्टम लेगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। DIAL इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्च अपने संसाधनों से उठा रहा है।
फिलहाल इस प्रोजेक्ट का डिजाइन तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही टर्मिनल 3 पर 'पियर ई' का निर्माण कार्य भी जारी है, जिसके अप्रैल 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है। एयरपोर्ट का लक्ष्य अपनी सालाना यात्री क्षमता को बढ़ाकर 125 मिलियन करना है, जिसे 2036 तक 129 मिलियन तक ले जाने की योजना है।