दिल्ली एयरपोर्ट पर 2030 तक चलेगा ड्राइवरलेस ट्रांजिट सिस्टम, खर्च होंगे 3,500 करोड़

इन्दिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने एयरपोर्ट परिसर के भीतर एक हाई-टेक दिल्ली एयरपोर्ट ड्राइवरलेस ट्रांजिट सिस्टम यानी ऑटोमेटेड पीपल मूवर (APM) शुरू करने की योजना बनाई है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर करीब 3,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसका पूरा निवेश DIAL खुद करेगा।
यह प्रोजेक्ट एयरपोर्ट के 10 साल के मास्टर प्लान का एक अहम हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालना है। वर्तमान में एयरपोर्ट की सालाना क्षमता 106 मिलियन यात्रियों की है, जिसे बढ़ाकर 125 मिलियन और संभावित रूप से 129 मिलियन तक ले जाने का लक्ष्य है। इसमें करीब 86 मिलियन घरेलू और 39 मिलियन अंतरराष्ट्रीय यात्री शामिल होंगे।
टर्मिनल्स के बीच का सफर होगा आसान और तेज
इस ड्राइवरलेस सिस्टम की कुल लंबाई 7.3 किलोमीटर होगी, जो छह अलग-अलग स्टेशनों के जरिए टर्मिनल 1, टर्मिनल 2, टर्मिनल 3, एरोसिटी और कार्गो सिटी को आपस में जोड़ेगा। इस कॉरिडोर का करीब 5.7 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड (ऊंचाई पर) होगा, जबकि 2 किलोमीटर का हिस्सा ग्राउंड लेवल पर चलेगा।
सबसे बड़ा बदलाव टर्मिनल 1 और टर्मिनल 3 के बीच के सफर में आएगा। अभी यात्री शटल बस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस नए सिस्टम के आने के बाद यह दूरी महज 13 मिनट में तय हो जाएगी। DIAL के सीईओ प्रदीप पणिक्कर ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का डिजाइन वर्क शुरू हो चुका है और निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे पूरा करने में करीब 30 महीने लगेंगे।
शुरुआती अनुमान के मुताबिक, पहले साल में यह सिस्टम रोजाना 55,000 यात्रियों को सेवा देगा, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 80,000 से 90,000 दैनिक यात्रियों तक ले जाने की क्षमता विकसित की जाएगी। खास बात यह है कि ट्रांजिट यात्रियों के लिए यह सेवा मुफ्त होगी, हालांकि बाहरी आगंतुकों के लिए मामूली शुल्क लगाने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही, इसे दिल्ली मेट्रो लाइनों से भी जोड़ा जाएगा।
विस्तार की इस कड़ी में टर्मिनल 3 पर एक नया 'पियर ई' (Pier E) भी अप्रैल 2030 तक बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे एयरपोर्ट की कार्यक्षमता और बेहतर होगी।