दिल्ली की हवा 'मॉडरेट' लेकिन यमुना में फिर लौटा जहरीला सफेद झाग
दिल्ली की हवा 'moderate' श्रेणी में है, लेकिन यमुना में फिर से जहरीला सफेद झाग देखा गया है। जानें प्रदूषण की वर्तमान स्थिति और GRAP-1 के नियम।

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या एक बार फिर चर्चा में है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) को 168 दर्ज किया, जो 'मॉडरेट' श्रेणी में आता है। हालांकि, दिनभर की रियल-टाइम मॉनिटरिंग में कुछ जगहों पर AQI 246 तक पहुंच गया, जो 'गंभीर' श्रेणी की ओर इशारा करता है। ऐसे में दिल और फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, आसमान साफ रहेगा और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। सबसे बड़ी चिंता हवा की रफ्तार को लेकर है, जो 10 किमी प्रति घंटे से कम रहने वाली है। हवा की यह धीमी गति PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषकों को फैलने नहीं देगी, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है। आंकड़ों के मुताबिक, शहर में प्रदूषण का करीब 23.8% हिस्सा केवल वाहनों के उत्सर्जन से आ रहा है।
GRAP-1 लागू और यमुना की बदहाली
प्रदूषण के बढ़ते खतरे को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर से Graded Response Action Plan (GRAP) के पहले चरण (Stage 1) को लागू कर दिया है। इसके तहत तंदूरों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई गई है और डीजल जनरेटरों के उपयोग पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
एक तरफ हवा खराब है, तो दूसरी तरफ यमुना नदी की हालत और बिगड़ गई है। कालिंदी कुंज के पास नदी में फिर से जहरीला सफेद झाग देखा गया है। यह स्थिति तब सामने आई है जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नदी के पुनरुद्धार के लिए करीब 9,000 करोड़ रुपये के मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन का दावा किया था। CPCB की जांच के अनुसार, यह झाग डिटर्जेंट सर्फेक्टेंट्स, बिना उपचार के बहने वाले सीवेज और औद्योगिक कचरे के मिलने से बनता है। नदी की तलहटी में जमा कीचड़ के कारण अमोनिया का स्तर बढ़ने से यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे न केवल स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं बल्कि पानी की आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है।