दिल्ली की हवा फिलहाल 'मोडरेट', प्रदूषण रोकने के लिए लागू हुए सख्त नियम

राजधानी दिल्ली में इन दिनों वायु गुणवत्ता (AQI) में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का औसत AQI 179 दर्ज किया गया है, जिससे शहर की हवा 'मोडरेट' श्रेणी में बनी हुई है। हालांकि, शहर के कुछ इलाकों में स्थिति अब भी चिंताजनक है। द्वारका सेक्टर 8 में प्रदूषण का स्तर 305 तक पहुंच गया, जिसे 'वेरी पुअर' श्रेणी में रखा गया है, जबकि 11 अन्य निगरानी केंद्रों ने 'खराब' स्तर दर्ज किया है।
प्रदूषण की इस चुनौती से निपटने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने अपना विंटर एक्शन प्लान पूरी तरह लागू कर दिया है। अब शहर में 'नो PUCC, नो फ्यूल' पॉलिसी सख्ती से लागू है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपके वाहन के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) नहीं है, तो पेट्रोल पंप आपको ईंधन देने से मना कर सकते हैं। नियम तोड़ने वालों पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और ड्राइविंग लाइसेंस भी सस्पेंड किया जा सकता है।
GRAP के तहत BS-III और BS-IV वाहनों पर पाबंदी
संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत वर्तमान में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों के संचालन पर सीमाएं लगाई गई हैं। CAQM के चेयरमैन राजेश वर्मा ने सभी संबंधित एजेंसियों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं ताकि सर्दियों की शुरुआत के साथ बढ़ने वाले प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
विशेषज्ञों और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) का मानना है कि अब दिल्ली केवल आपातकालीन उपायों के बजाय एक स्थायी और सक्रिय ढांचे की ओर बढ़ रही है। हालांकि, मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, हवा की धीमी गति और गिरते तापमान के कारण आने वाले दिनों में प्रदूषण के कण फिर से बढ़ सकते हैं।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो 1 नवंबर 2026 से दूसरे चरण (Phase 2) के प्रतिबंध लागू होंगे। इसमें बाहरी राज्यों से आने वाले गैर-BS-VI वाहनों पर प्रतिबंध और 50 प्रतिशत वर्क-फ्रॉम-होम जैसे कड़े निर्देश शामिल हो सकते हैं। फिलहाल, मौसम शुष्क बना हुआ है और आने वाले दिनों में हल्के बादल या बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है।