दिल्ली की हवा फिर हुई जहरीली, AQI 304 के साथ 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा

सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली वालों के लिए एक बार फिर प्रदूषण की चुनौती खड़ी हो गई है। राजधानी की वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है, जिससे शहर की हवा अब सांस लेने लायक नहीं रह गई है। 18 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 304 तक जा पहुंचा, जिसे 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में रखा गया है।
शहर के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग रहा। सबसे खराब स्थिति वजीरपुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टूल इंजीनियरिंग में देखी गई, जहां AQI 414 के शिखर पर पहुंच गया। वहीं, श्री अरबिंदो मार्ग पर सबसे कम 151 का स्तर दर्ज किया गया। हवा में मौजूद PM2.5 का स्तर 138 µg/m³ और PM10 का स्तर 168 µg/m³ मापा गया है। इससे पहले 17 अक्टूबर को भी औसत AQI 300 था और शाम होते-होते करीब एक दर्जन इलाकों में प्रदूषण का स्तर 200 के पार निकल गया था।
सरकार का 'विंटर एक्शन प्लान' और नए प्रतिबंध
प्रदूषण की इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने अपना 'विंटर एक्शन प्लान' शुरू कर दिया है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि हालांकि 2026 में अब तक 211 दिन हवा की गुणवत्ता अच्छी, संतोषजनक या मध्यम रही है, जो 2016 के बाद का सबसे बेहतर प्रदर्शन है, लेकिन अब सर्दियों की चुनौतियों के लिए तैयारी जरूरी है।
सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए 1 अक्टूबर से 'नो PUCC, नो फ्यूल' पॉलिसी लागू कर दी है। इसके अलावा, 1 नवंबर से कई नए प्रतिबंध लागू होंगे, जिनमें शामिल हैं:
- कुछ व्यावसायिक वाहनों के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध।
- बसों के लिए अनिवार्य रूप से CNG, इलेक्ट्रिक या BS-VI मानक होना जरूरी।
- ऑफिसों में 50% वर्क-फ्रॉम-होम पॉलिसी का कार्यान्वयन।
- 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाले निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक।
अधिकारियों का मानना है कि हवा की धीमी गति और बारिश की कमी के कारण प्रदूषक तत्व हवा में तैरते रहे और बिखर नहीं पाए, जिससे प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ गया है।