दिल्ली में AQI 261 के पार, प्रदूषण रोकने के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू
दिल्ली में AQI 261 के साथ सीजन के सबसे खराब स्तर पर पहुंचा। प्रदूषण रोकने के लिए सरकार ने कड़े प्रतिबंध और वर्क फ्रॉम होम लागू किया है।

राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। 1 नवंबर 2026 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 261 के स्तर पर पहुंच गया, जो इस सीजन की सबसे खराब रीडिंग है। पिछले 198 दिनों में प्रदूषण का स्तर इतना अधिक नहीं देखा गया था। जैसे ही प्रदूषण बढ़ा, सरकार ने अपनी विंटर एक्शन प्लान की सख्ती शुरू कर दी, जिसके कारण दिल्ली-गुरुग्राम और दिल्ली-नोएडा बॉर्डर समेत कई टोल प्लाजा पर भारी ट्रैफिक जाम देखा गया।
प्रदूषण पर लगाम के लिए सरकार के कड़े कदम
प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक के लिए कई कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। अब दिल्ली के बाहर पंजीकृत वे वाहन शहर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे जो BS-VI मानकों के अनुरूप नहीं हैं। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों, CNG वाहनों और एम्बुलेंस, फायर टेंडर व पुलिस जैसी आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट दी गई है। इसके अलावा, 'नो PUC, नो फ्यूल' नीति शुरू की गई है, जिसके तहत बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUCC) वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा।
निर्माण कार्यों पर भी पूरी तरह लगाम कसी गई है। 31 जनवरी तक धूल उड़ाने वाले सभी बाहरी निर्माण और विध्वंस कार्यों पर रोक लगा दी गई है, जबकि 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच निर्माण परियोजनाओं पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए नगर निगम पार्किंग शुल्क को दोगुना कर दिया गया है।
दफ्तरों के कामकाज में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के लिए 50% वर्क-फ्रॉम-होम अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, कार्यालयों के समय में बदलाव किया गया है; अब MCD दफ्तर सुबह 8:30 से शाम 5:00 बजे तक और दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 10:00 से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे।
इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ट्रांसपोर्ट विभाग, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और DPCC की टीमें तैनात हैं। निगरानी के लिए ANPR कैमरों और AI-आधारित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का सहारा लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि विंटर एक्शन प्लान का मुख्य उद्देश्य सख्त नियंत्रण और 24 घंटे निगरानी के जरिए हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है, और इसके लिए नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है।