दिवाली से पहले दिल्ली की हवा हुई जहरीली, कई इलाकों में AQI 400 के पार
दिल्ली की हवा दिवाली से पहले बेहद खराब हो गई है। AQI 400 के पार पहुंचा, जिसके बाद प्रशासन ने GRAP-2 के तहत सख्त कदम उठाए हैं।

राजधानी दिल्ली में दिवाली का त्योहार आने से पहले ही हवा की गुणवत्ता बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। मंगलवार सुबह 8 बजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 330 दर्ज किया गया, जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, शहर के कई इलाकों की स्थिति इससे कहीं ज्यादा गंभीर है, जहां AQI 400 के पार निकलकर 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया है।
सबसे ज्यादा असर जहांगीरपुरी में देखा गया है, जहां AQI 449 से 452 के बीच दर्ज हुआ। इसके अलावा रोहिणी (429), पंजाबी बाग (424), अलीपुर (413), विवेक विहार (410), बवाना (408) और नरेला (406) जैसे इलाकों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर है। हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में प्रदूषण में कितनी तेजी से उछाल आया है; 30 अक्टूबर को औसत AQI 124 था, जो महज 96 घंटों के भीतर 400 के पार पहुंच गया।
प्रशासन ने लागू किया GRAP-2, वर्क फ्रॉम होम की सलाह
हवा की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण (Stage II) को लागू कर दिया है। इसके तहत अब प्रशासन काफी सख्त रुख अपना रहा है।
- वाहनों पर सख्ती: दिल्ली के बाहर से आने वाले वे वाहन जो BS-VI मानक पूरे नहीं करते, उन्हें बॉर्डर पर ही रोका जा रहा है।
- पार्किंग शुल्क: अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क को 31 जनवरी 2027 तक दोगुना कर दिया गया है।
- ऑफिस नियम: सरकारी और निजी कार्यालयों से 50% कर्मचारियों को वर्क-from-home (घर से काम) करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
- जुर्माना: PUC सर्टिफिकेट न होने पर सैकड़ों चालान काटे गए हैं और निर्माण कार्यों में नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हवा की धीमी गति, गिरता तापमान, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना और स्थानीय स्तर पर वाहनों का धुआं व निर्माण धूल इस बदतर स्थिति के मुख्य कारण हैं। अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार, अगले दो दिनों तक हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' रहने की संभावना है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण स्वस्थ लोगों और सांस की बीमारी से जूझ रहे मरीजों, दोनों के लिए बेहद जोखिम भरा हो सकता है।