दिल्ली की हवा फिर हुई खराब, AQI 229 पहुंचा; प्रदूषण रोकने के लिए सरकार ने कसी कमर
दिल्ली की हवा फिर हुई खराब, AQI 229 पहुंचा। सरकार ने निर्माण कार्यों पर रोक और वर्क फ्रॉम होम जैसे कड़े कदम उठाए हैं।

राजधानी दिल्ली में सर्दियों की आहट के साथ ही प्रदूषण का स्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। 29 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की दिल्ली एयर क्वालिटी 'खराब' श्रेणी में दर्ज की गई, जहां औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 229 रहा। यह पिछले दिन के मुकाबले मामूली बढ़त है, लेकिन शहर के कई इलाकों में हालात काफी चिंताजनक हैं। जहां एक तरफ लोधी रोड और मैदान गढ़ी जैसे इलाकों में हवा की स्थिति संतोषजनक रही, वहीं उत्तम नगर और मुंडका जैसे क्षेत्रों में AQI 330 के पार चला गया, जिससे वहां की हवा 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण से निपटने के लिए लागू हुआ 'विंटर मास्टर प्लान'
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर से ही ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू कर दिया है। इसके तहत निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के सख्त नियम, कोयले और लकड़ी के उपयोग पर प्रतिबंध और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की कड़ी चेकिंग की जा रही है।
इतना ही नहीं, दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से 28 फरवरी तक के लिए एक विशेष 'विंटर मास्टर प्लान' तैयार किया है। इस योजना के तहत कुछ कड़े कदम उठाए गए हैं:
- निर्माण कार्यों पर रोक: 1 नवंबर से 31 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
- वर्क फ्रॉम होम: प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों के 50% कर्मचारियों को इस अवधि के दौरान घर से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
- बाहरी वाहनों पर पाबंदी: 1 नवंबर से 31 जनवरी तक BS-VI मानक पूरे न करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों का दिल्ली में प्रवेश वर्जित होगा (इलेक्ट्रिक, CNG और आपातकालीन वाहन इसमें शामिल नहीं हैं)।
- PUC अनिवार्य: 'नो PUC, नो फ्यूल' की नीति पूरे साल सख्ती से लागू रहेगी।
IITM की AATAL लैब के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण कचरा और पराली जलाना (29.1%) और वाहनों से होने वाला उत्सर्जन (25%) है। इसके अलावा सड़क की धूल और अन्य एरोसोल भी हवा को जहरीला बना रहे हैं। हालांकि मौसम विभाग ने हल्की बारिश और तेज हवाओं की भविष्यवाणी की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मौसम के भरोसे रहकर प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता। फिलहाल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।