दिल्ली की हवा हुई जहरीली, AQI 'खराब' श्रेणी में पहुंचा; सरकार लागू करेगी विंटर एक्शन प्लान

राजधानी दिल्ली में सर्दियों की दस्तक के साथ ही प्रदूषण का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। शहर की दिल्ली एयर क्वालिटी अब 'मॉडरेट' से गिरकर 'खराब' श्रेणी में आ गई है। ठंड की वजह से प्रदूषक तत्व जमीन के करीब जमा हो रहे हैं, जिससे हवा में धुंध छा गई है और सांस लेना मुश्किल हो रहा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 20 अक्टूबर को न्यूनतम तापमान 17.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और AQI 139 से बढ़कर 179 हो गया। हालात तब और बिगड़े जब 21 अक्टूबर को एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (AQEWS) ने AQI को 'खराब' श्रेणी में दर्ज किया। दिल्ली के कुछ इलाकों में तो स्थिति और भी गंभीर है; मुंडका में AQI 325 तक पहुंच गया, जबकि नई दिल्ली के कुछ हिस्सों में यह 366 के स्तर पर था, जिसे 'गंभीर' (Severe) माना जाता है।
प्रदूषण के मुख्य कारण और सरकार की तैयारी
प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, परिवहन उत्सर्जन से PM2.5 में 23.02% की हिस्सेदारी है, जबकि आवासीय स्रोतों का योगदान 6% है। इसके अलावा औद्योगिक गतिविधियां और सड़कों की धूल भी हवा को जहरीला बना रही हैं। एक बड़ी चिंता पराली जलाने से जुड़ी है, जिसका योगदान 21 अक्टूबर तक 4% से बढ़कर 12% होने का अनुमान है।
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से 28 फरवरी तक 'विंटर एक्शन प्लान' लागू करने की तैयारी की है। इस योजना के तहत कड़े कदम उठाए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:
- 'नो PUC, नो फ्यूल' पॉलिसी का सख्ती से पालन।
- निर्माण और विध्वंस (C&D) गतिविधियों पर पाबंदी।
- 1 नवंबर से 31 जनवरी तक BS-VI मानक से कम वाले गैर-दिल्ली पंजीकृत वाहनों के प्रवेश पर रोक।
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली ने इस साल अच्छा प्रदर्शन किया है। 17 अक्टूबर तक शहर में 211 दिन 'अच्छी, संतोषजनक और मध्यम' वायु गुणवत्ता दर्ज की गई, जो 2016 के बाद सबसे बेहतर रिकॉर्ड है। हालांकि, अब आने वाले दिन दिल्ली के लिए एक बड़ी चुनौती होंगे, क्योंकि अगले छह दिनों तक हवा की गुणवत्ता 'खराब' रहने की संभावना है।