दिल्ली की हवा हुई जहरीली, AQI 'खराब' श्रेणी में पहुंचते ही GRAP-1 प्रतिबंध लागू

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। 21 अक्टूबर 2026 को शहर की दिल्ली वायु गुणवत्ता GRAP-1 के दायरे में आ गई, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-1) के पहले चरण के प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के आंकड़ों के मुताबिक, दोपहर 2:00 बजे तक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 244 दर्ज किया गया, जिससे हवा 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
हवा की यह गिरावट काफी चिंताजनक है क्योंकि 20 अक्टूबर को AQI 169 था, जो महज एक दिन में काफी ऊपर चढ़ गया। शहर के कुछ इलाकों की स्थिति और भी गंभीर है; पूसा में AQI 318 और चांदनी चौक में 302 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। अक्टूबर की शुरुआत से ही दिल्ली में सूक्ष्म कणों (PM2.5) के स्तर में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।
पराली जलने और मौसम का असर, सख्ती शुरू
प्रदूषण बढ़ने के पीछे एक बड़ी वजह पंजाब में पराली जलाना है। 15 सितंबर से 19 अक्टूबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की 368 घटनाएं दर्ज की गईं, जो पिछले साल की तुलना में अधिक हैं। अनुमान है कि इस सीजन की अधिकांश पराली जलाने की घटनाएं अभी बाकी हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। साथ ही, मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि हवा की धीमी गति और तापमान के बदलाव के कारण आने वाले कुछ समय तक हवा की गुणवत्ता खराब बनी रहेगी।
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित कड़े कदम उठाए हैं:
- होटलों और रेस्टोरेंट में कोयले के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- डीजल जनरेटर के उपयोग को केवल आपातकालीन स्थितियों तक सीमित कर दिया गया है।
- सड़कों की सफाई और धूल को दबाने के लिए पानी के छिड़काव का काम तेज कर दिया गया है।
- निर्माण स्थलों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
पर्यावरण मंत्री सिरसा ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली सरकार का 'विंटर एक्शन प्लान' 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस योजना के तहत, जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) नहीं होगा, उन्हें ईंधन की बिक्री नहीं की जाएगी।