दिल्ली की हवा फिर हुई खराब, 100 दिनों बाद AQI पहुंचा 'Poor' कैटेगरी में

राजधानी दिल्ली के लिए राहत के दिन अब खत्म होते दिख रहे हैं। करीब 100 दिनों के लंबे अंतराल के बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' (Poor) श्रेणी में पहुंच गई है। 21 अक्टूबर 2026 को दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 216 दर्ज किया गया है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के नियमों के अनुसार, जब AQI 201 से 300 के बीच होता है, तो इसे 'खराब' माना जाता है।
हवा की गुणवत्ता गिरने के पीछे मौसम का मिजाज एक बड़ी वजह बनकर उभरा है। हवा की रफ्तार कम होने और वेंटिलेशन इंडेक्स के 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे गिरने के कारण प्रदूषक तत्व जमीन के करीब ही सिमट गए हैं। साथ ही, सर्दियों की दस्तक और तापमान में गिरावट ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है। केवल स्थानीय प्रदूषण ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों में इस महीने पराली जलाने के 19 मामले भी सामने आए हैं, जिसने दिल्ली की हवा को और जहरीला कर दिया है।
सरकार का 'विंटर एक्शन प्लान' और सख्त नियम
प्रदूषण की इस चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नागरिकों के 'सांस लेने के अधिकार' पर जोर देते हुए सरकार की प्रतिबद्धता जताई है। इसी कड़ी में 1 नवंबर से 28 फरवरी तक चलने वाला 'विंटर एक्शन प्लान' लागू किया जाएगा। इस प्लान के तहत 'नो PUC, नो फ्यूल' की सख्त नीति अपनाई जाएगी। इसके अलावा, 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच BS-VI मानकों से कम वाले बाहरी राज्यों के वाहनों के प्रवेश पर भी पाबंदी रहेगी।
दूसरी ओर, कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को मंजूरी दे दी है। CAQM की टास्क फोर्स पहले ही एक्शन मोड में है, जिसने हाल ही में निर्माण कार्यों और औद्योगिक साइटों के निरीक्षण के दौरान 55 उल्लंघन पकड़े हैं।
भविष्य की तैयारी के तौर पर IIT मद्रास के प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला की अध्यक्षता वाली एक विशेषज्ञ समिति ने 2040 तक पूरी तरह से 'जीरो-टेलपाइप-इमिशन' वाहनों की ओर बढ़ने का प्रस्ताव दिया है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मौसमी स्मॉग सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है, इसलिए समय रहते उत्सर्जन नियंत्रण के उपाय करना बेहद जरूरी है।