दिल्ली की हवा फिर हुई खराब, औसत AQI 235 पहुंचा; कई इलाकों में स्थिति गंभीर
दिल्ली में वायु गुणवत्ता गिरकर 'खराब' श्रेणी में आ गई है। जानें किन इलाकों में प्रदूषण सबसे ज्यादा है और BS-VI नियमों का क्या असर होगा।

राजधानी दिल्ली के लिए राहत के दिन खत्म होते दिख रहे हैं। पिछले चार दिनों से 'मध्यम' श्रेणी में बनी रहने वाली दिल्ली की वायु गुणवत्ता बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को अचानक गिर गई और अब यह 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है। शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 229 से 235 के बीच दर्ज किया गया है, जो मंगलवार को 197 था।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़े डराने वाले हैं। शहर के कुल 58 निगरानी केंद्रों में से 41 केंद्रों ने हवा की गुणवत्ता को 'खराब' बताया है, जबकि केवल 16 केंद्र ही मध्यम श्रेणी में रहे। सबसे ज्यादा बुरा हाल विवेक विहार का है, जहां AQI 316 से 323 के बीच दर्ज किया गया, जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा जहांगीरपुरी (ITE) में यह आंकड़ा 480 तक पहुंच गया, जबकि नरेला, सोनिया विहार और सिरी फोर्ट जैसे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर 290 के पार रहा। इस प्रदूषण का मुख्य कारण PM2.5 कणों की अधिकता है।
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार के कड़े कदम
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए 21 अक्टूबर से ही 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की धीमी गति और कम वेंटिलेशन इंडेक्स की वजह से प्रदूषक तत्व हवा में ही टिके हुए हैं और बिखर नहीं पा रहे हैं। हालांकि, मौसम विभाग (IMD) ने उम्मीद जताई है कि गुरुवार को हल्की बारिश और शुक्रवार को गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं, जिससे हवा में कुछ सुधार होगा।
प्रदूषण से निपटने के लिए परिवहन अधिकारियों ने एक बड़ा फैसला लिया है। 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक उन वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर पाबंदी होगी जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते। बताया गया है कि ऐसे करीब 10 लाख वाहन प्रभावित होंगे।
FICCI की एक रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन उत्सर्जन, निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक गतिविधियां और घरेलू ईंधन प्रदूषण के बड़े कारण हैं। हालांकि, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले साल के मुकाबले कमी आई है, लेकिन फिर भी 1 से 27 अक्टूबर के बीच 767 मामले दर्ज किए गए हैं।