दिल्ली में वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए 13 नए स्टेशन शुरू, AI कमांड सेंटर रखेगा नजर

राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने अपनी निगरानी प्रणाली को काफी मजबूत किया है। अब दिल्ली में कुल 60 निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) हो गए हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं। हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 13 नए स्टेशनों का उद्घाटन किया है। ये नए स्टेशन नरेला, बदरपुर और नांगलोई जैसे इलाकों में लगाए गए हैं, जिससे करीब 17 लाख अतिरिक्त लोग अब इस निगरानी दायरे में आ गए हैं।
इस पूरी रणनीति का मुख्य केंद्र शास्त्री पार्क में स्थित दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) का AI-सक्षम इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) है। यह सेंटर एक डिजिटल "वॉर रूम" की तरह काम करता है, जो 24 घंटे चालू रहता है। यहाँ निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, शोर, पराली जलाने और औद्योगिक उत्सर्जन से जुड़े डेटा को एक साथ जोड़कर विश्लेषण किया जाता है। हाल ही में इस सेंटर के डैशबोर्ड ने चेतावनी दी कि शहर के 44 स्टेशनों पर PM10 और 43 स्टेशनों पर PM2.5 का स्तर तय सीमा से काफी ज्यादा था, जिसका मुख्य कारण प्रदूषकों का स्थानीय स्तर पर ही फँसे रहना था।
औद्योगिक इकाइयों पर रहेगी कैमरों से नजर
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए केवल सेंसर ही नहीं, बल्कि अब कैमरों का भी सहारा लिया जाएगा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने NCR की सभी अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को 30 नवंबर, 2026 तक पैन-टिल्ट-ज़ूम (PTZ) कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। ये कैमरे औद्योगिक स्टैक और ईंधन फीडिंग पॉइंट्स की लाइव वीडियो फीड सीधे अधिकारियों को भेजेंगे। यह कदम IIT कानपुर और CPCB की सिफारिशों के आधार पर तय किए गए सख्त उत्सर्जन मानकों (50 mg/Nm³) को लागू करने के लिए उठाया गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण को कम करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए आधुनिक तकनीक और विभागों के बीच आपसी तालमेल जरूरी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि स्टेशनों का विस्तार 5 किमी-बनाम-5 किमी ग्रिड रणनीति के तहत किया जा रहा है। वर्तमान में, कमांड सेंटर ने 15 नियोजित बाहरी प्रणालियों में से 9 को जोड़ लिया है, जिससे सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग में लापरवाही और खुले में कचरा जलाने जैसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी।
हालांकि, इस विस्तार के बावजूद सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि दिल्ली की लगभग 51% आबादी (करीब 1.2 करोड़ लोग) अभी भी 2 किमी के निगरानी दायरे से बाहर है, जो भविष्य में और विस्तार की जरूरत को दर्शाता है।