दिल्ली की हवा का हाल: औसत AQI में सुधार, लेकिन हॉटस्पॉट इलाकों में प्रदूषण अब भी गंभीर

दिल्ली की हवा में मिला-जुला असर, औसत AQI 190 रहा लेकिन कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 300 के पार पहुंचा। जानें GRAP-1 की स्थिति।

Kittu Kumari24 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली की हवा का हाल: औसत AQI में सुधार, लेकिन हॉटस्पॉट इलाकों में प्रदूषण अब भी गंभीर

राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता को लेकर मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। 24 अक्टूबर 2026 की सुबह 8 बजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 190 दर्ज किया गया, जो 'मध्यम' श्रेणी में आता है। हालांकि, यह आंकड़ा राहत देने वाला लग सकता है, लेकिन शहर के कई हॉटस्पॉट इलाकों की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां प्रदूषण का स्तर 300 के पार यानी 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया है।

अगर स्थानीय आंकड़ों पर नजर डालें तो अलीपुर में AQI 258 और DTU में 251 दर्ज किया गया। वहीं, IIT दिल्ली में यह 227, बुराड़ी में 181 और आनंद विहार में 175 रहा। केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि पड़ोसी शहर नोएडा के सेक्टर-62 में AQI 270 और सेक्टर-125 में 212 दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले 23 अक्टूबर को सुबह 9:31 बजे तक दिल्ली का AQI 337 तक पहुंच गया था और जहांगीरपुरी जैसे इलाकों में यह लगातार 300 के ऊपर बना हुआ था।

GRAP-1 लागू और यमुना में दिखा जहरीला झाग

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हवा की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण (Stage-I) को सक्रिय कर दिया है। इसके तहत निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, होटलों में कोयला और लकड़ी जलाने पर पाबंदी लगाई गई है और सड़कों पर धूल रोकने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग और पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

प्रदूषण का असर केवल हवा में ही नहीं, बल्कि पानी में भी दिख रहा है। आज सुबह कालिंदी कुंज के पास यमुना नदी की सतह पर जहरीला सफेद झाग तैरता हुआ देखा गया, जो नदी के बढ़ते प्रदूषण की गवाही दे रहा है।

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, आज दिल्ली-NCR में मौसम साफ और शुष्क रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। तापमान 19°C से 32°C के बीच रहने की उम्मीद है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाने को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। विश्लेषक यादव के अनुसार, लंबे समय तक राहत पाने के लिए वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक कचरे और सड़कों की धूल पर सख्ती से कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।

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