दिल्ली में बिगड़ा हवा का हाल, कई इलाकों में AQI पहुंचा 'खराब' स्तर पर

दिल्ली में हवा की गुणवत्ता बिगड़ रही है। कई इलाकों में AQI 'खराब' श्रेणी में पहुंचा, प्रशासन ने एंटी-स्मॉग गन और वाटर स्प्रिंकलर लगाए।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में बिगड़ा हवा का हाल, कई इलाकों में AQI पहुंचा 'खराब' स्तर पर

राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण ने दस्तक दे दी है। 27 अक्टूबर 2026 को शहर के अलग-अलग हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के मिले-जुले आंकड़े सामने आए हैं। जहां केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने औसत AQI 166 से 175 के बीच बताकर इसे 'मध्यम' श्रेणी में रखा, वहीं कुछ इलाकों की स्थिति काफी चिंताजनक है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण का स्तर 246 तक पहुंच गया, जबकि CRRI मथुरा रोड जैसे इलाकों में यह 257 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है।

मौसम विभाग और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी ने चेतावनी दी है कि 28 अक्टूबर तक हवा की गुणवत्ता खराब बनी रह सकती है। इसका मुख्य कारण हवा की धीमी गति है। अधिकारियों के अनुसार, हवा की औसत रफ्तार 10 किमी प्रति घंटे से कम है, जिसकी वजह से प्रदूषक तत्व हवा में तैरते रहते हैं और बिखर नहीं पा रहे हैं।

प्रदूषण से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

बढ़ते प्रदूषण और धूल को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन एक्शन मोड में है। कृष्णा मेनन मार्ग और सुनहरी बाग रोड जैसे व्यस्त इलाकों में वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। गौरतलब है कि 21 अक्टूबर को ही दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया गया था। इसके तहत तंदूरों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी है और गैर-जरूरी सेवाओं के लिए डीजल जनरेटर के उपयोग को सीमित किया गया है।

इतना ही नहीं, 1 नवंबर से एक व्यापक 'विंटर एक्शन प्लान' शुरू होने जा रहा है। इस प्लान के तहत बाहरी राज्यों के गैर-BS VI कमर्शियल वाहनों की एंट्री पर रोक, पार्किंग फीस में बढ़ोतरी और फरवरी 2027 के अंत तक पब्लिक व प्राइवेट सेक्टर में 50% वर्क-फ्रॉम-होम का आदेश दिया जा सकता है।

थिंक टैंक 'एनविरोकैटालिस्ट्स' के आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली के प्रदूषण में सबसे बड़ी हिस्सेदारी ट्रांसपोर्ट की है, जो कुल उत्सर्जन का 23.8% है। इसके अलावा रिहायशी इलाके (6%), उद्योग (4.9%), निर्माण कार्य (3.3%) और पराली जलाना (4.6%) प्रदूषण के अन्य मुख्य कारण हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले सालों की तुलना में अक्टूबर 2026 में प्रदूषण का स्तर थोड़ा कम रहा है।

Share:

Comments

Leave a comment