दिल्ली की हवा हुई जहरीली, AQI 'वेरी पुअर' श्रेणी में; सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर कसी नकेल
दिल्ली की हवा हुई जहरीली, AQI 324 पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल और समय को लेकर जारी किए कड़े निर्देश।

राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। 2 नवंबर 2026 की सुबह 8 से 9 बजे के बीच दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 312 दर्ज किया गया, जो इस सीजन में पहली बार 'वेरी पुअर' (बहुत खराब) श्रेणी में पहुंचा है। हालात और भी बिगड़ते गए और शाम 4 बजे तक यह आंकड़ा 324 तक जा पहुंचा। मौसम के प्रतिकूल पूर्वानुमान और बिगड़ती हवा को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली-NCR में तत्काल प्रभाव से 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के स्टेज II उपायों को लागू कर दिया है।
ग्रीन पटाखों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तय किया समय और नियम
प्रदूषण के इस संकट के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर एक विस्तृत नियामक ढांचा जारी किया है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी. वरले की बेंच ने स्पष्ट किया है कि केवल CSIR-NEERI द्वारा प्रमाणित 'ग्रीन पटाखों' के इस्तेमाल की अनुमति होगी।
कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, इन पटाखों को केवल 7 और 8 नवंबर 2026 को ही चलाया जा सकेगा। इसके लिए समय की सख्त पाबंदी तय की गई है—सुबह 6:00 से 7:00 बजे तक और रात 8:00 से 10:00 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकेंगे। इसके अलावा, अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, शिक्षण संस्थानों और अधिसूचित साइलेंस ज़ोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे फोड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग को लेकर भी कोर्ट ने कड़े निर्देश दिए हैं:
- जिन व्यापारियों के लाइसेंस पहले रद्द किए गए थे, उन्हें ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए 4 से 6 नवंबर तक अस्थायी रूप से बहाल किया जाएगा।
- केवल वही निर्माता पटाखे बना सकते हैं जिनके पास CSIR-NEERI और PESO का वैध प्रमाणन है।
- हर ग्रीन पटाखे के बॉक्स पर एक विशिष्ट QR कोड होना अनिवार्य है और बॉक्स सीलबंद होना चाहिए।
- लड़ी वाले पटाखों और बेरियम युक्त पटाखों पर प्रतिबंध जारी रहेगा।
ध्यान रहे कि 9 नवंबर 2026 से पूरे क्षेत्र में ग्रीन पटाखों सहित सभी प्रकार के पटाखों पर फिर से पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाएगा।