दिल्ली की हवा में सुधार, लेकिन क्या GRAP के उपाय वाकई कारगर हैं?
दिल्ली की हवा में सुधार हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों ने GRAP के उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। जानिए क्या है सरकार का नया विंटर एक्शन प्लान।

राजधानी दिल्ली के लिए राहत की खबर है कि शनिवार सुबह हवा की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है। 24 अक्टूबर 2026 की सुबह 9 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 185 दर्ज किया गया, जिससे हवा 'मध्यम' श्रेणी में आ गई है। इससे पहले शुक्रवार शाम तक औसत AQI 230 था और पिछले तीन दिनों से शहर 'खराब' श्रेणी की हवा में सांस ले रहा था। हालांकि, इस सुधार के बीच विशेषज्ञों ने सरकार की प्रतिक्रियात्मक रणनीति पर सवाल उठाए हैं।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर को दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू किया था। नए नियमों के तहत अब कमर्शियल तंदूरों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक है, निर्माण कार्यों के लिए धूल नियंत्रण अनिवार्य कर दिया गया है और नॉन-मेट्रो पार्किंग शुल्क को दोगुना कर दिया गया है। इसके साथ ही, दिल्ली मेट्रो ने ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई है और एमसीडी व दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के लिए काम के घंटों में बदलाव (staggered hours) किया गया है।
विंटर एक्शन प्लान और विशेषज्ञों की राय
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2026-27 के लिए एक 10-सूत्रीय विंटर एक्शन प्लान की घोषणा की है, जो 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा। इस योजना की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- 500 पेट्रोल पंपों पर 'नो PUC, नो फ्यूल' का सख्ती से पालन।
- सरकारी और निजी क्षेत्रों के लिए 50% वर्क-फ्रॉम-होम की नीति।
- दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड नॉन-BS-VI डीजल और पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध।
- 608 एंटी-स्मॉग गन और 1,150 मिस्ट-स्प्रे यूनिट्स की तैनाती।
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण की यह समस्या क्षेत्रीय है, जिसमें करीब 30% प्रदूषण स्थानीय है, जबकि 60-65% हिस्सा आसपास के राज्यों से आता है।
दूसरी ओर, सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषण ने GRAP की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विश्लेषक मनोज कुमार के अनुसार, 2022 के बाद से जब भी GRAP के तीसरे और चौथे चरण लागू किए गए, उनमें से 12 में से 10 बार प्रदूषण का स्तर और बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान योजनाएं अक्सर PM10 पर केंद्रित रहती हैं, जबकि सर्दियों में PM2.5 मुख्य प्रदूषक होता है।
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) ने चेतावनी दी है कि कम हवा की गति के कारण 26 अक्टूबर तक हवा की गुणवत्ता फिर से 'खराब' श्रेणी में जा सकती है।