दिल्ली की हवा हुई बेहद जहरीली, AQI 377 पहुंचा तो लागू हुआ GRAP-II
दिल्ली की हवा हुई बेहद खराब, AQI 377 के पार। पराली जलाने और प्रदूषण के चलते GRAP-II लागू, निर्माण कार्यों पर लगी रोक।

राजधानी दिल्ली के लिए सांस लेना अब और भी मुश्किल होता जा रहा है। 4 नवंबर 2026 को दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) गिरकर 377 के स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले 288 दिनों का सबसे खराब स्तर है। शहर की हवा अब 'बहुत खराब' श्रेणी में आ गई है, जबकि 22 मॉनिटरिंग स्टेशनों ने तो 'गंभीर' प्रदूषण दर्ज किया है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि दिवाली के करीब आते ही 6 और 7 नवंबर के बीच प्रदूषण के और ज्यादा बढ़ने की आशंका है।
पराली जलाने से बढ़ा संकट, पंजाब के जिलों को नोटिस
प्रदूषण में इस अचानक उछाल की बड़ी वजह पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना है। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के प्रदूषण में पराली का योगदान एक दिन में 8.2% से बढ़कर 16.2% हो गया है, जिसके शुक्रवार तक 20% तक पहुंचने का अनुमान है। सैटेलाइट तस्वीरों में 4 नवंबर को छह राज्यों में कुल 467 खेत जलते हुए देखे गए, जिनमें मध्य प्रदेश (157), पंजाब (151) और राजस्थान (111) सबसे आगे रहे। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड में भी आग दर्ज की गई है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में ग्रैडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण (Stage II) को लागू कर दिया है। साथ ही, पंजाब के बठिंडा, बरनाला, फाजिल्का, जालंधर और फरीदकोट जिलों के जिला आयुक्तों और एसएसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
प्रदूषण के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली की हवा को खराब करने में 69% योगदान बाहरी स्रोतों का है, जबकि 31% प्रदूषण स्थानीय कारणों से हो रहा है।
निर्माण कार्यों पर पाबंदी और वाहनों पर सख्ती
दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से ही सर्दियों के लिए प्रदूषण नियंत्रण का नया ढांचा लागू कर दिया है। इसके तहत अब 31 जनवरी तक निजी निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, दिल्ली के बाहर पंजीकृत उन वाहनों के प्रवेश पर भी पाबंदी लगाई गई है जो BS-IV या उससे पुराने मानक के हैं। प्रशासन की कोशिश है कि दिवाली से पहले प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके, ताकि नागरिकों को और अधिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना न करना पड़े।