दिल्ली में बिगड़ी हवा: CAQM ने प्रदूषण रोकने के लिए लागू किए फेज 1 उपाय

राजधानी दिल्ली में सर्दियों की दस्तक के साथ ही हवा की गुणवत्ता एक बार फिर गिरने लगी है। दिल्ली वायु गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर प्रशासन अब अलर्ट मोड पर है, क्योंकि अक्टूबर की शुरुआत में ही AQI के आंकड़े चिंताजनक संकेत दे रहे हैं। 1 अक्टूबर को जो AQI 166 था, वह 4 अक्टूबर तक बढ़कर 196 तक पहुंच गया, जिससे हवा की स्थिति 'मध्यम' से बदलकर 'खराब' श्रेणी में आ गई है।
आने वाले 6 से 10 दिनों के पूर्वानुमान बताते हैं कि हवा की गुणवत्ता 'संतोषजनक' और 'मध्यम' के बीच झूलती रहेगी। सबसे बड़ी चिंता यह है कि हवा की रफ्तार धीमी रहने वाली है और बारिश की संभावना नहीं है, जिसका मतलब है कि प्रदूषक तत्व हवा में ही फंसे रहेंगे और लोगों की सेहत पर असर डालेंगे।
प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए CAQM का एक्शन प्लान
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 1 अक्टूबर 2026 से अपने विंटर पोल्यूशन कंट्रोल प्लान के 'फेज 1' को सक्रिय कर दिया है। यह फैसला CAQM के एनफोर्समेंट टास्क फोर्स की 140वीं बैठक के बाद लिया गया है। प्रशासन अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर सख्ती बरत रहा है।
हालिया कार्रवाई की बात करें तो 8 से 24 सितंबर के बीच पूरे NCR में कुल 197 निरीक्षण किए गए, जिनमें 85 जगहों पर नियमों की अनदेखी पाई गई। इसके बाद दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न निर्माण स्थलों के लिए 30 सितंबर तक सख्त आदेश जारी किए गए।
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अब इन क्षेत्रों पर खास नजर रखी जा रही है:
- इंडस्ट्रियल जोन और वहां चलने वाले डीजल जनरेटर (DG) सेट।
- निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) वाली साइटें।
- सड़कों पर उड़ने वाली धूल और कचरा प्रबंधन।
लोक निर्माण विभाग (PWD) समेत अन्य संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे धूल नियंत्रण उपायों को प्राथमिकता दें। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य स्थानीय प्रदूषण के स्रोतों को कम करना है, ताकि आने वाले समय में पराली जलाने जैसे मौसमी कारकों से पैदा होने वाले संकट को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके।