दिल्ली की हवा फिर हुई जहरीली, AQI 240 के पार पहुँचने से बढ़ी चिंता

राजधानी दिल्ली में एक बार फिर सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही दिल्ली की वायु गुणवत्ता (Delhi Air Quality) में भारी गिरावट दर्ज की गई है। शहर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 240 के पार निकल गया है, जिससे प्रदूषण का स्तर फिर से चिंताजनक हो गया है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में बारिश और तेज हवाओं ने लोगों को थोड़ी राहत दी थी, लेकिन अब प्रदूषकों के न फैल पाने के कारण हवा में जहर घुलने लगा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग है, लेकिन कई इलाके 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गए हैं। आनंद विहार जैसे इलाकों में तो स्थिति और भी गंभीर है, जहां AQI 348 तक रिकॉर्ड किया गया। वहीं मुंडका में यह 227 और जहांगीरपुरी में 212 के करीब रहा। मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मौसम शुष्क और साफ रहेगा और 22 अक्टूबर 2026 तक बारिश की कोई संभावना नहीं है, जिससे धूल और प्रदूषक तत्वों का जमाव और बढ़ सकता है।
GRAP और विंटर एक्शन प्लान की तैयारी
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में 'इनवर्जन' की स्थिति बन रही है, जिसमें दिन गर्म और रातें ठंडी होती हैं। यह स्थिति वातावरण में एक ढक्कन की तरह काम करती है, जिससे प्रदूषित हवा ऊपर नहीं जा पाती और जमीन के करीब ही फंस जाती है। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू करने की तैयारी कर ली है। इसके तहत चार चरणों में पाबंदियां लगाई जाएंगी, जिसमें धूल नियंत्रण से लेकर निर्माण कार्यों पर रोक और भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध शामिल हो सकता है।
प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने 'विंटर एक्शन प्लान 2026-27' भी शुरू कर दिया है। इस बार तकनीक का सहारा लेते हुए एक AI-आधारित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया गया है और निगरानी केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है। साथ ही, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए 500 पेट्रोल पंपों पर 'नो PUCC, नो फ्यूल' का कड़ा नियम लागू किया गया है, ताकि बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट वाले वाहनों में ईंधन न भरा जा सके।