दिल्ली की हवा फिर हुई 'खराब', प्रदूषण रोकने के लिए सरकार ने कसी कमर
दिल्ली की हवा फिर हुई 'खराब', AQI 229 पहुंचा। सरकार ने लागू किए प्रदूषण नियंत्रण के कड़े उपाय और 10 सूत्रीय विंटर प्लान।

राजधानी दिल्ली में एक बार फिर सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। 28 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) गिरकर 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, औसत AQI 229 दर्ज किया गया। हालांकि पिछले चार दिनों से स्थिति कुछ बेहतर थी, लेकिन अब प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। शहर के कुछ इलाकों का हाल तो और भी बुरा है, जहां विवेक विहार जैसे क्षेत्रों में AQI 316 तक पहुंच गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है।
सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि पड़ोसी शहरों में भी धुंध और प्रदूषण का असर साफ दिख रहा है। नोएडा में AQI 239 और ग्रेटर नोएडा में 233 दर्ज किया गया, वहीं हरियाणा के पानीपत में यह स्तर 328 तक जा पहुंचा है।
GRAP स्टेज 1 लागू और विंटर एक्शन प्लान की तैयारी
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर को ही पूरे NCR में 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के स्टेज 1 को लागू कर दिया था। इसके तहत 25 विशेष कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी का छिड़काव और खुले में कचरा जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है।
इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 20 अक्टूबर को सर्दियों के लिए एक व्यापक 10-सूत्रीय योजना की घोषणा की है, जो 1 नवंबर से 28 फरवरी तक प्रभावी रहेगी। इस योजना की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- 'नो PUC, नो फ्यूल': बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहनों में ईंधन नहीं भरा जा सकेगा।
- वर्क फ्रॉम होम: प्रदूषण के चरम स्तर पर ऑफिस जाने के बजाय घर से काम करने की व्यवस्था।
- निर्माण कार्य पर रोक: सर्दियों के पीक महीनों में कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज पर पाबंदी।
CAQM ने अपने GRAP फ्रेमवर्क को अपडेट कर अब इसमें चार चरणों में कुल 48 कार्रवाइयां शामिल की हैं, जिससे डीजल जनरेटर और अंतर-राज्यीय बसों पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया अब और तेज होगी। आंकड़ों के अनुसार, 28 अक्टूबर को दिल्ली के कुल प्रदूषण में ट्रांसपोर्ट सेक्टर की हिस्सेदारी 19.3% रही। हालांकि, मौसम विभाग ने बारिश के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है, जिससे लोगों को इस जहरीली हवा से थोड़ी राहत मिल सकती है। तकनीकी निगरानी और कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने CII और चिंतन एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप के साथ समझौता (MoU) भी किया है।