दिल्ली में जहरीली हुई हवा, 'सीवियर' जोन दोगुने होने पर निर्माण कार्यों पर लगा बैन
दिल्ली की हवा हुई और जहरीली, AQI 377 पहुंचा। CAQM ने निर्माण कार्यों पर रोक लगाई और ऑफिसों में 50% वर्क फ्रॉम होम का आदेश दिया है।

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे शहर एक बार फिर प्रदूषण की चपेट में है। औसत AQI 377 तक पहुंच गया है, जबकि IIT दिल्ली जैसे कुछ केंद्रों पर तो यह 458 के खतरनाक स्तर तक जा चुका है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पिछले 24 घंटों में 'सीवियर' श्रेणी (AQI 400 से ऊपर) में आने वाले इलाकों की संख्या 10 से बढ़कर 22 हो गई है। जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग, मुंडका और विवेक विहार जैसे इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।
ऑफिसों में 50% वर्क फ्रॉम होम और कंस्ट्रक्शन पर रोक
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 5 नवंबर से 20 नवंबर तक के लिए कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। अब पूरे NCR में धूल उड़ाने वाले तोड़फोड़ और बाहरी निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हालांकि, रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, अस्पताल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रोजेक्ट्स को इस बैन से बाहर रखा गया है।
इतना ही नहीं, प्रदूषण के असर को कम करने के लिए दिल्ली और NCR के प्रमुख जिलों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के सरकारी और निजी दफ्तरों में अब केवल 50% कर्मचारी ही ऑफिस जा सकेंगे, बाकी सभी को घर से काम (Work From Home) करना होगा। सिर्फ उन्हीं औद्योगिक इकाइयों और जरूरी सेवाओं को इससे छूट दी गई है जहां रिमोट वर्क संभव नहीं है।
प्रदूषण से निपटने के लिए GRAP-II के तहत सड़कों पर मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव और निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए पार्किंग फीस बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के मुताबिक, हवा की धीमी रफ्तार की वजह से प्रदूषक तत्व वातावरण में ही फंसे हुए हैं। अनुमान है कि 6 और 7 नवंबर के बीच हवा की गुणवत्ता और ज्यादा खराब होकर 'सीवियर' श्रेणी में जा सकती है। इस प्रदूषण के पीछे स्थानीय परिवहन, निर्माण कार्य की धूल और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने का बड़ा हाथ है, जिसका योगदान करीब 20% से 22% तक माना जा रहा है।