दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण का 25% हिस्सा वाहनों से, IITM की नई लैब ने किया खुलासा

IITM की नई लैब ने खुलासा किया कि दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में 25% योगदान वाहनों का है। जानें प्रदूषण के अन्य मुख्य कारण क्या हैं।

Kittu Kumari25 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण का 25% हिस्सा वाहनों से, IITM की नई लैब ने किया खुलासा

राजधानी दिल्ली में जहरीली हवा से निपटने के लिए अब वैज्ञानिक डेटा का सहारा लिया जा रहा है। हाल ही में शुरू हुई एक अत्याधुनिक लैब के शुरुआती आंकड़ों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण के स्तर में लगभग 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी अकेले वाहनों की है। यह जानकारी भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) द्वारा न्यू राजेंद्र नगर कैंपस में स्थापित 'इंटीग्रेटेड एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड एरोसोल टॉक्सिसिटी एनालिसिस लैब' से सामने आई है।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 24 अक्टूबर 2026 को इस लैब का उद्घाटन किया। 80 करोड़ रुपये की लागत से 'मिशन मौसम' के तहत बनाई गई यह लैब अब रीयल-टाइम में यह विश्लेषण कर सकेगी कि हवा में मौजूद प्रदूषकों का रासायनिक संगठन क्या है। अब तक शहर की नीतियां केवल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के नंबरों पर आधारित थीं, लेकिन अब सबूतों के आधार पर ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।

प्रदूषण के अन्य बड़े कारण और रासायनिक जटिलता

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लैब के उद्घाटन के दिन मिले आंकड़ों के अनुसार, केवल वाहन ही नहीं बल्कि अन्य कारक भी हवा को जहरीला बना रहे हैं। डेटा के मुताबिक, सेकेंडरी ऑर्गेनिक एरोसोल का योगदान 18.4 प्रतिशत, सेकेंडरी इनऑर्गेनिक एरोसोल का 16.5 प्रतिशत, सड़क की धूल का 10.9 प्रतिशत और कचरा जलाने का हिस्सा 5 प्रतिशत रहा।

प्रोजेक्ट डायरेक्टर सचिन घुडे ने बताया कि शहर के पार्टिकुलेट मैटर (PM) का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा प्राइमरी पार्टिकल्स से बना होता है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत हिस्सा वायुमंडलीय रासायनिक प्रतिक्रियाओं (सेकेंडरी एरोसोल) के जरिए बनता है। चुनौती यह है कि इन सेकेंडरी प्रदूषकों के सटीक स्रोत का पता लगाना फिलहाल मुश्किल है।

लैब के शुरुआती पांच दिनों के विश्लेषण में यह देखा गया कि सेकेंडरी स्रोतों का योगदान 29.3 से 42.2 प्रतिशत के बीच रहा, जो कई बार वाहनों के उत्सर्जन (19.4 से 27.6 प्रतिशत) से भी अधिक था। यह लैब अब 'AIRWISE' सिस्टम के साथ मिलकर 400 मीटर के रेजोल्यूशन के साथ 72 घंटे का वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रदान करेगी।

मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह लैब यह पहचानने में मदद करेगी कि किस समय कौन सी गतिविधियां प्रदूषण बढ़ा रही हैं। उम्मीद है कि इस सटीक डेटा के बाद सरकार 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के तहत केवल सामान्य पाबंदियों के बजाय टारगेटेड कंट्रोल यानी सटीक कार्रवाई कर पाएगी। आने वाले समय में इस लैब की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए IIT दिल्ली के साथ भी सहयोग किया जाएगा।

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