दिल्ली में जहरीली हवा का कहर: डॉ. रंदीप गुलेरिया ने प्रदूषण को बताया 'साइलेंट किलर'

डॉ. रंदीप गुलेरिया ने दिल्ली के जहरीले प्रदूषण को 'साइलेंट किलर' बताया है। जानें यह स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है और बचाव के तरीके।

Kittu Kumari5 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में जहरीली हवा का कहर: डॉ. रंदीप गुलेरिया ने प्रदूषण को बताया 'साइलेंट किलर'

राजधानी दिल्ली इन दिनों जहरीली हवा और स्मॉग की मोटी चादर में लिपटी हुई है, जिससे सांस लेना दूभर हो गया है। इस गंभीर स्थिति के बीच मेदांता (गुरुग्राम) के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल मेडिसिन, रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन के चेयरमैन डॉ. रंदीप गुलेरिया ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण एक 'साइलेंट किलर' की तरह काम करता है। उनका कहना है कि यह न केवल नई बीमारियां पैदा करता है, बल्कि शरीर में पहले से मौजूद बीमारियों को और अधिक गंभीर बना देता है।

डॉ. गुलेरिया के अनुसार, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'गंभीर' या 'अत्यधिक गंभीर' श्रेणी में पहुंच जाता है, तो यह बुजुर्गों, छोटे बच्चों और फेफड़ों या दिल की पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। उन्होंने बताया कि हर साल जब AQI इस स्तर पर पहुंचता है, तो अस्पतालों के इमरजेंसी वार्डों में सांस फूलने और खांसी की शिकायतों वाले मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाती है, जिनमें से कई को ICU में भर्ती करना पड़ता है।

फेफड़ों और दिल पर पड़ता है बुरा असर

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प्रदूषण का सीधा असर हमारे शरीर के ऑक्सीजन स्तर और सूजन (inflammation) पर पड़ता है। डॉ. गुलेरिया ने विस्तार से बताया कि:

  • पुरानी बीमारियां: अस्थमा और COPD जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों में प्रदूषण के कारण फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं में सूजन बढ़ जाती है, जिससे ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है।
  • स्वस्थ लोग: जो लोग स्वस्थ हैं, वे भी सीने में जकड़न, आंखों से पानी आना और सांस लेने में तकलीफ महसूस करने लगते हैं।
  • बच्चों पर प्रभाव: लंबे समय तक खराब हवा के संपर्क में रहने से बच्चों के फेफड़ों का विकास रुक सकता है और उनकी कार्यक्षमता कम हो सकती है।

प्रदूषण के कारणों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि सर्दियों में ठंडी हवा प्रदूषकों को जमीन के करीब रोक लेती है, जिससे वे बाहर नहीं निकल पाते। इसके साथ ही पराली जलाना, डीजल का अधिक उपयोग, वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण कार्य और पटाखों का धुआं इस समस्या को और गंभीर बना देता है। उन्होंने सुझाव दिया कि पटाखों पर रोक और पराली जलाने में कमी लाकर इस स्थिति में सुधार किया जा सकता है।

बचाव के लिए डॉ. गुलेरिया की सलाह:

डॉक्टर ने लोगों को सलाह दी है कि जब AQI बहुत खराब हो, तो घर के अंदर ही रहें और बाहर व्यायाम करने से बचें। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो N95 मास्क का उपयोग करें। साथ ही, खिड़की-दरवाजे बंद रखने, एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने और अपनी नियमित दवाइयां या इनहेलर समय पर लेने की हिदायत दी है।

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