दिल्ली वायु प्रदूषण: सरकारी एजेंसियां ही बढ़ा रही हैं प्रदूषण, ग्राउंड रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
दिल्ली में AQI बिगड़ने के बीच सरकारी एजेंसियों पर ही प्रदूषण बढ़ाने का आरोप लगा है। जानें क्या है पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

राजधानी दिल्ली में सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि जिन सरकारी एजेंसियों को प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हीं पर प्रदूषण बढ़ाने के आरोप लगे हैं। एक हालिया ग्राउंड रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि शहर के कई इलाकों में भारी मात्रा में रोड डस्ट और धुआं देखा गया है, जो यह दर्शाता है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू किए गए नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, शाम 4 बजे AQI 229 दर्ज किया गया, जो पिछले दिन के 197 से काफी ज्यादा है। वहीं, विवेक विहार जैसे इलाकों की स्थिति और भी गंभीर है, जहां AQI 316 तक पहुंच गया, जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है। केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि एनसीआर के अन्य शहर जैसे नोएडा (246), ग्रेटर नोएडा (220), गाजियाबाद (210) और गुरुग्राम (203) में भी हवा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
प्रदूषण के मुख्य कारण और सरकारी नाकामियां
डेटा के मुताबिक, दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण ट्रांसपोर्ट सेक्टर है, जिसकी हिस्सेदारी 19.3% है। इसके अलावा एनर्जी सेक्टर (5%), रेजिडेंशियल सोर्स (5.1%), इंडस्ट्रीज (4.8%), कंस्ट्रक्शन (2.5%), कचरा जलाने (1.8%) और रोड डस्ट (1.3%) की भी बड़ी भूमिका है।
हैरानी की बात यह है कि कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर को ही GRAP का स्टेज-1 लागू कर दिया था। इसके तहत मशीनों से सड़कों की सफाई, पानी का छिड़काव और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल पर सख्त नियंत्रण के निर्देश दिए गए थे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
हालांकि, दिल्ली सरकार ने अपना 'विंटर एक्शन प्लान' शुरू किया है, जिसके तहत 1 अक्टूबर से 'नो PUCC, नो फ्यूल' पॉलिसी लागू की गई है। साथ ही 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर के उन वाहनों पर पाबंदी लगाने की योजना है जो BS-VI मानक पूरे नहीं करते। इसके बावजूद, जानकारों का कहना है कि जब तक नगर निगम और राज्य एजेंसियां डस्ट मिटिगेशन प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन नहीं करेंगी, तब तक आम जनता की सेहत पर खतरा बना रहेगा।