दिवाली से पहले दिल्ली में जहरीली हुई हवा, कई इलाकों में AQI 480 के पार
दिल्ली की हवा हुई जहरीली, कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंचा। जानिए कैसे हरियाली इस संकट को कम कर सकती है।

दिवाली का त्योहार करीब है, लेकिन राजधानी दिल्ली के लिए यह समय एक गंभीर स्वास्थ्य संकट लेकर आया है। शहर एक बार फिर घने स्मॉग की चादर में लिपटा हुआ है, जिससे सांस लेना दूभर हो गया है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 367 से 482 के बीच झूल रहा है, जो दिल्ली की हवा को 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में खड़ा करता है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि शहर के कम से कम 18 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 के आंकड़े को पार कर गया है।
सबसे बुरा हाल जहांगीरपुरी का है, जहां AQI 460 तक पहुंच गया। इसके अलावा पंजाबी बाग, नरेला, रोहिणी, आरके पुरम, बवाना, नॉर्थ कैंपस, पटपргаंज, विवेक विहार, अलीपुर, मुंडका, सोनिया विहार और नौरोजी नगर रिंग रोड जैसे इलाकों में हवा बेहद जहरीली हो चुकी है। गौरतलब है कि 4 नवंबर को पिछले 288 दिनों का सबसे खराब दिन रहा, जब 24 घंटे का औसत AQI 377 दर्ज किया गया। मौसम विभाग और एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम की मानें तो 6 और 7 नवंबर के बीच हवा की गति कम होने के कारण स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
हरियाली और प्रदूषण का गहरा संबंध
इस प्रदूषण संकट के बीच एक 30 साल पुरानी रिसर्च ने शहर के शहरी पारिस्थितिकी (Urban Ecology) पर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली में केवल पेड़ लगाना काफी नहीं है, बल्कि उनका सही तरीके से व्यवस्थित होना ज्यादा जरूरी है। रिसर्च बताती है कि छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखरी हरियाली के मुकाबले बड़े और आपस में जुड़े हुए हरे क्षेत्र शहर के तापमान को कम करने में ज्यादा कारगर होते हैं। आंकड़ों के अनुसार, अगर स्थानीय हरित क्षेत्र में करीब 8% की वृद्धि की जाए, तो महसूस होने वाले तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है।
वहीं, अक्टूबर 2026 के एक हालिया अध्ययन ने यह भी दिखाया कि प्रदूषण का असर अब पेड़ों पर भी दिख रहा है। आनंद विहार जैसे अत्यधिक प्रदूषित इलाकों के सड़क किनारे लगे पेड़ों में क्लोरोफिल की कमी पाई गई है और उनकी पानी सोखने की क्षमता भी घट गई है। इसके विपरीत, लुटियंस दिल्ली जैसे हरे-भरे इलाकों के पेड़ ज्यादा स्वस्थ हैं। इसका मतलब यह है कि प्रदूषण अब उन पेड़ों की क्षमता को भी खत्म कर रहा है जो हवा को साफ करने का काम करते हैं।
वर्तमान में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) लगातार नजर बनाए हुए है और प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-II) के दूसरे चरण को लागू कर दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और सांस या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को सलाह दी है कि वे बाहर निकलने से बचें, क्योंकि हवा का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है।