दिल्ली की हवा में सुधार: 10 साल में सबसे कम रहा प्रदूषण का स्तर
दिल्ली की हवा में सुधार देखा गया है। GRAP के पहले चरण और नई लैब की शुरुआत से प्रदूषण कम हुआ है, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है।

राजधानी दिल्ली के लिए एक राहत भरी खबर आई है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को शहर की वायु गुणवत्ता में हल्का सुधार दर्ज किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के दौर को छोड़कर, इस तारीख के लिए पिछले एक दशक में दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सबसे निचले स्तर पर रहा है। हालांकि, चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। जहां केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने सुबह 8 बजे AQI 190 (मध्यम श्रेणी) दर्ज किया, वहीं कुछ अन्य निगरानी स्रोतों ने इसे 296 बताया है, जो यह दर्शाता है कि प्रदूषण की समस्या अब भी बनी हुई है।
हवा में इस सुधार का मुख्य कारण कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) द्वारा 21 अक्टूबर को 'ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान' (GRAP) के पहले चरण को लागू करना है। लगातार तीन दिनों तक हवा की गुणवत्ता 'खराब' रहने के बाद यह कदम उठाया गया था। वर्तमान प्रतिबंधों के तहत कमर्शियल तंदूरों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है, डीजल जनरेटर सेटों पर पाबंदी है और निर्माण स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
प्रदूषण रोकने के लिए सरकार ने कसी कमर
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने पिछले 24 घंटों में कड़ा एक्शन लिया है। अधिकारियों ने 9,883 वाहनों के चालान काटे हैं। साथ ही, सड़कों से धूल हटाने के लिए मैकेनिकल स्वीपर्स और वाटर-स्प्रिंकलिंग यूनिट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्टूबर को प्रदूषण का करीब 20.38% हिस्सा परिवहन से था, जबकि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से PM2.5 स्तर में 5.16% की बढ़ोतरी हुई।
लंबे समय तक प्रदूषण के प्रबंधन के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने 'इंटीग्रेटेड एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड एरोसोल टॉक्सिसिटी एनालिसिस लेबोरेटरी' (AATAL) की शुरुआत की है। यह नई लैब केवल AQI बताने के बजाय, प्रदूषकों के सटीक स्रोतों की रीयल-टाइम पहचान करने में मदद करेगी।
इतने प्रयासों के बावजूद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्थिति अभी भी नाजुक है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के अनुसार, हवा की गति कम होने की वजह से 26 अक्टूबर तक वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में रह सकती है। पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने जिला प्रशासनों को हॉटस्पॉट के हिसाब से एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, 1 नवंबर से 'विंटर एक्शन प्लान' लागू होगा, जिसमें 'नो PUC, नो फ्यूल' जैसी सख्त नीतियां शामिल होंगी।