दिल्ली में वायु प्रदूषण का डबल अटैक: स्थानीय उत्सर्जन घटा, लेकिन बाहरी राज्यों का धुआं बढ़ा

दिल्ली में स्थानीय प्रदूषण घटने के बावजूद बाहरी राज्यों के धुएं से बिगड़ी हवा, GRAP-1 के तहत पाबंदियां लागू।

Kittu Kumari23 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में वायु प्रदूषण का डबल अटैक: स्थानीय उत्सर्जन घटा, लेकिन बाहरी राज्यों का धुआं बढ़ा

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा की चपेट में है। इस बार स्थिति थोड़ी अलग और चुनौतीपूर्ण है। दिल्ली में स्थानीय स्तर पर प्रदूषण फैलाने वाले कारकों में तो कमी आई है, लेकिन पड़ोसी राज्यों से आने वाले धुएं ने संकट को और बढ़ा दिया है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के डेटा के मुताबिक, 23 अक्टूबर को स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी 35.085% थी, जिसके 25 अक्टूबर तक घटकर 29.447% होने की उम्मीद है। लेकिन जैसे-जैसे स्थानीय प्रदूषण कम हो रहा है, बाहर से आने वाला धुआं दिल्ली की हवा को और खराब कर रहा है।

दिल्ली की हवा पिछले तीन दिनों से 'खराब' श्रेणी में बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 22 अक्टूबर की शाम को AQI 223 दर्ज किया गया था, लेकिन 23 अक्टूबर की सुबह कुछ इलाकों में यह आंकड़ा 337 तक पहुंच गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। मौसम की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर से ही ग्रैडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण (Stage I) को लागू कर दिया है।

GRAP-1 के तहत सख्त पाबंदियां और आगामी रणनीति

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प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कई कड़े कदम उठाए हैं। वर्तमान में लागू GRAP-1 के तहत निम्नलिखित प्रतिबंध प्रभावी हैं:

  • होटलों और रेस्टोरेंट के तंदूरों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
  • डीजल जनरेटर का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है।
  • सड़कों पर पानी का छिड़काव और मैकेनिकल स्वीपिंग अनिवार्य कर दी गई है।
  • कचरा जलाने पर सख्त पाबंदी है, जिसे दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनिंदर सिंह बेग सख्ती से लागू करवा रहे हैं।

आने वाले समय के लिए भी सरकार ने तैयारी कर ली है। 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सरकारी कर्मचारियों के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। वहीं, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की योजना है। इसके अलावा, 2026 के लिए एक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिसमें पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना लगाने और उल्लंघन करने वाले कृषि क्षेत्रों को 'रेड कैटेगरी' में डालने का प्रस्ताव है।

राहत की बात यह है कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) को उम्मीद है कि 24 अक्टूबर को पश्चिमी विक्षोभ के कारण होने वाली बारिश से हवा में सुधार हो सकता है। हालांकि, वायुमंडलीय वैज्ञानिक गुफरान बेग ने चेतावनी दी है कि इस साल 'एल नीनो' का प्रभाव काफी मजबूत है, जिससे PM2.5 कणों का संचय और परिवहन प्रभावित हो सकता है। CREA के आंकड़े भी बताते हैं कि पिछले चार वर्षों में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता में कोई स्थायी सुधार नहीं देखा गया है।

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