दिल्ली में प्रदूषण का कहर: GRAP लागू होने के बाद भी हवा खराब, अब नए मास्टर प्लान का सहारा

दिल्ली में वायु प्रदूषण रोकने के लिए GRAP लागू और नवंबर से नया मास्टर प्लान आएगा। जानें क्या हैं नए नियम और प्रतिबंध।

Kittu Kumari26 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में प्रदूषण का कहर: GRAP लागू होने के बाद भी हवा खराब, अब नए मास्टर प्लान का सहारा

राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा की चपेट में है। हालांकि 25 अक्टूबर 2026 को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में मामूली सुधार देखा गया और यह 191 के साथ 'मध्यम' श्रेणी में आया, लेकिन यह राहत बहुत कम समय के लिए थी। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुमान बताते हैं कि 26 से 28 अक्टूबर के बीच हवा की गुणवत्ता फिर से 'खराब' स्तर पर पहुंच जाएगी। इसका मुख्य कारण हवा की धीमी गति और कम वेंटिलेशन इंडेक्स है, जिसकी वजह से प्रदूषक तत्व हवा में तैरते रहते हैं और बिखर नहीं पाते।

प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर 2026 को 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के पहले चरण (Stage-I) को सक्रिय कर दिया है। इसके तहत निर्माण कार्यों, सड़क की धूल और कुछ खास श्रेणियों के वाहनों पर पाबंदी लगाई गई है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कई हॉटस्पॉट इलाकों में अभी भी मलबे का ढेर दिख रहा है और नियमों की अनदेखी की जा रही है। इसी स्थिति को देखते हुए पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम दिल्ली के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की है ताकि नियमों को सख्ती से लागू किया जा सके।

नवंबर से लागू होगा सख्त 'मास्टर प्लान' और नई लैब की शुरुआत

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सरकार अब एक व्यापक 'मास्टर प्लान' लेकर आ रही है, जो 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस योजना के तहत प्रदूषण से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:

  • वाहनों पर पाबंदी: नॉन-BS6 मॉडल वाले वाहनों के लिए सख्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
  • ईंधन नीति: 'नो PUC, नो फ्यूल' (बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र, कोई ईंधन नहीं) की नीति लागू होगी।
  • वर्क फ्रॉम होम: सरकारी और निजी क्षेत्रों में 50% कर्मचारियों के लिए घर से काम करने का प्रावधान किया जा सकता है।

सिर्फ प्रतिबंध ही नहीं, बल्कि प्रदूषण के असली कारणों को समझने के लिए तकनीक का सहारा भी लिया जा रहा है। 24 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 'इंटीग्रेटेड एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड एरोसोल टॉक्सिसिटी एनालिसिस लेबोरेटरी' (AATAL) का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक लैब केवल AQI रीडिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रीयल-टाइम में यह पता लगाएगी कि प्रदूषण किस रसायन से और किस स्रोत से पैदा हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि GRAP और वर्क-फ्रॉम-होम जैसे उपाय तात्कालिक राहत तो दे सकते हैं, लेकिन दिल्ली को प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त करने के लिए अनियोजित शहरी विकास, वाहनों की बढ़ती संख्या और बुनियादी ढांचे की कमियों जैसे बुनियादी मुद्दों पर लंबे समय तक काम करना होगा।

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