दिल्ली की हवा हुई जहरीली: सांस लेना अब रोजाना 3.8 सिगरेट पीने जैसा
दिल्ली की हवा हुई जहरीली, AQI 230 के पार। GRAP-1 लागू और वर्क फ्रॉम होम जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं।

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण का कहर टूट पड़ा है। हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि यहां सांस लेना अब सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2026 की शाम 5 बजे तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 230 तक पहुंच गया, जो 'गंभीर' श्रेणी में आता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बर्कले अर्थ के आकलन के अनुसार, दिल्ली की इस प्रदूषित हवा में सांस लेना किसी गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए भी रोजाना लगभग 3.8 सिगरेट पीने के बराबर है।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली है। हवा की गुणवत्ता मंगलवार को 179 (मध्यम) थी, जो बुधवार दोपहर 2 बजे तक तेजी से बढ़कर 244 हो गई। इसके बाद कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने तुरंत एक्शन लेते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-1) का पहला चरण लागू कर दिया है। इस पाबंदी के तहत अब होटलों और रेस्टोरेंट्स में कोयले व लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जबकि डीजल जनरेटरों का उपयोग केवल आपातकालीन स्थितियों में ही किया जा सकेगा।
सरकार का 'विंटर एक्शन प्लान' और कड़े नियम
मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता ने साल 2026-27 के लिए एक व्यापक 'विंटर एक्शन प्लान' पेश किया है, जो 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस योजना के तहत आम जनता और दफ्तरों के लिए कई कड़े नियम तय किए गए हैं:
- नो PUC, नो फ्यूल: 1 नवंबर से बिना प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) के वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा।
- बाहरी वाहनों पर रोक: 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच BS-6 मानकों को पूरा न करने वाले बाहरी वाहनों का दिल्ली में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
- वर्क फ्रॉम होम: सरकारी और निजी कार्यालयों के लिए 50% कर्मचारियों के घर से काम करने का आदेश दिया गया है।
- पार्किंग शुल्क: मेट्रो स्टेशनों को छोड़कर शहर के अधिकांश इलाकों में पार्किंग फीस दोगुनी कर दी गई है।
- ऑफिस टाइमिंग: भीड़ कम करने के लिए ऑफिस के समय में बदलाव किया गया है। MCD दफ्तर अब सुबह 8:30 से शाम 5:00 बजे तक और दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 10:00 से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे।
आम जनता की सुविधा के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने ट्रेनों के 20 अतिरिक्त फेरे शुरू किए हैं। वहीं, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति 104 करोड़ रुपये के एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसे 40 अलग-अलग जगहों पर लागू कर PM10 और PM2.5 के स्तर को 20% तक कम करने की कोशिश की जाएगी। केंद्र सरकार भी इस लड़ाई में जुटी है; केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रदूषण कम करने के लिए स्केलेबल टेक्नोलॉजी विकसित करने हेतु 15 स्टार्टअप्स के साथ हाथ मिलाया है।