दिल्ली में जहरीली हवा का कहर: अब फेफड़ों के साथ दिमाग और स्ट्रोक का बढ़ा खतरा

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से अब दिमाग पर खतरा मंडरा रहा है। जानें कैसे जहरीली हवा स्ट्रोक और माइग्रेन का कारण बन रही है।

Kittu Kumari29 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में जहरीली हवा का कहर: अब फेफड़ों के साथ दिमाग और स्ट्रोक का बढ़ा खतरा

दिल्ली में सर्दियों की दस्तक के साथ ही हवा जहरीली होने लगी है, लेकिन इस बार खतरा सिर्फ सांसों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दिल्ली एयर पॉल्यूशन ब्रेन हेल्थ और न्यूरोलॉजिकल फंक्शन के लिए गंभीर खतरा बन गया है। राजधानी के डॉक्टरों ने गौर किया है कि प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी के साथ ही लोगों में माइग्रेन, लगातार सिरदर्द, चक्कर आना और मानसिक थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन लोगों में पहले से ही वैस्कुलर रिस्क फैक्टर्स हैं, उनमें अचानक स्ट्रोक आने के मामले भी बढ़ रहे हैं।

मेडिकल रिसर्च के अनुसार, हवा में मौजूद बारीक कण (PM2.5) दिमाग तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा कर सकते हैं। इससे खून में थक्के जमने (prothrombotic state) की संभावना बढ़ जाती है, जो स्ट्रोक का मुख्य कारण बनता है। इसके अलावा, ओजोन और पार्टिकुलेट मैटर मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में असामान्य जमाव पैदा कर सकते हैं, जिससे धमनियों के पतला होने और ब्लीडिंग का जोखिम बढ़ जाता है।

प्रदूषण का स्तर और सरकार की तैयारी

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हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने दिल्ली का ओवरऑल AQI 229 दर्ज किया है, जिसे 'खराब' श्रेणी में रखा गया है। वहीं उत्तम नगर जैसे इलाकों में यह स्तर 341 तक पहुंच गया है, जो 'बहुत खराब' है। हालांकि मौसम विभाग ने हल्की बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है जिससे प्रदूषण कम हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बारिश काफी नहीं है।

इस संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक के लिए 'विंटर एक्शन प्लान' तैयार किया है। इस योजना के तहत कई कड़े कदम उठाए गए हैं:

  • नो PUC, नो फ्यूल: बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के ईंधन नहीं मिलेगा।
  • वाहन प्रतिबंध: BS-VI मानकों से कम वाले बाहरी राज्यों के वाहनों पर पाबंदी।
  • वर्क फ्रॉम होम: प्राइवेट ऑफिसों के लिए 50% कर्मचारियों के घर से काम करने का आदेश।
  • निर्माण कार्य पर रोक: धूल कम करने के लिए 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक कंस्ट्रक्शन बैन रहेगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बचाव के लिए कुछ जरूरी सलाह दी है। अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के डॉ. प्रदीप बाजद ने N95 मास्क और HEPA एयर प्यूरीफायर के इस्तेमाल की सलाह दी है, साथ ही प्रदूषण वाले महीनों में बाहर भारी एक्सरसाइज न करने को कहा है। वहीं न्यूट्रिशनिस्ट मनीषा भगत के अनुसार, विटामिन C, ओमेगा-3 और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर डाइट लेने से शरीर में जहरीली हवा के कारण होने वाली सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम किया जा सकता है।

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