दिल्ली में AI से सुधरेगा ट्रैफिक, 1789 करोड़ के प्रोजेक्ट से बदलेंगे सिग्नल

राजधानी दिल्ली की सड़कों पर घंटों ट्रैफिक जाम में फंसे रहने वालों के लिए राहत की खबर है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाने की तैयारी में है। इस पहल का मकसद न केवल सड़कों पर भीड़भाड़ को कम करना है, बल्कि सड़क सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करना भी है।
केंद्र सरकार ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 1,789.52 करोड़ रुपये की लागत वाले इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने इस प्रोजेक्ट पर मुहर लगाई है। अगले 24 महीनों के भीतर दिल्ली के 42 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर को इस आधुनिक सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिसमें C-DAC तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।
AI सिग्नल और ऑटोमेटिक चालान से होगी निगरानी
इस नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसके 1,092 एडेप्टिव ट्रैफिक सिग्नल होंगे। ये सिग्नल रीयल-टाइम डेटा के आधार पर खुद अपनी टाइमिंग बदल सकेंगे, जिससे ट्रैफिक का फ्लो बेहतर होगा। इसके अलावा, AI की मदद से नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नकेल कसी जाएगी। ओवरस्पीडिंग, गलत पार्किंग, सीट बेल्ट न पहनना और बिना हेलमेट गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट के जरिए कार्रवाई होगी।
ट्रैफिक पुलिस की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 4 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 110 लाख वाहनों के खिलाफ 27 लाख चालान काटे गए हैं, जिनसे कुल 120 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
सड़क सुरक्षा के साथ-साथ प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं। NCR में अब 'नो PUCC, नो फ्यूल' का नियम सख्ती से लागू है। साथ ही, 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में केवल CNG, इलेक्ट्रिक या BS-VI डीजल वाले कमर्शियल वाहनों को ही प्रवेश मिलेगा। जो लोग बार-बार ट्रैफिक नियमों को तोड़ रहे हैं, उनके ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने या ड्राइविंग बैन करने की तैयारी भी है।
हालिया गतिविधियों की बात करें तो पुलिस ने कनॉट प्लेस में 'राहगीरी' कार्यक्रम के लिए कार-फ्री जोन बनाया और जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किया, जहां करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लेकर तीन FIR दर्ज की गईं।