दिल्ली में 18 साल बाद बदलेंगे कृषि भूमि के सर्कल रेट, करोड़ों तक जा सकती है कीमत
दिल्ली सरकार 18 साल बाद कृषि भूमि के सर्कल रेट बढ़ाने की तैयारी में है। जानिए आपके इलाके में क्या होगा नया रेट।

दिल्ली सरकार राजधानी में कृषि भूमि (Agricultural Land) के सर्कल रेट में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। खास बात यह है कि सर्कल रेट्स में यह बदलाव पिछले 18 सालों में पहली बार होने जा रहा है। साल 2008 के बाद से इन दरों को अपडेट नहीं किया गया था, जिसके कारण जमीन की सरकारी कीमत और बाजार भाव में एक बड़ा अंतर आ गया है। अब सरकार मास्टर प्लान दिल्ली-2047 (MPD-2047) के तहत इन दरों को संशोधित करने की योजना बना रही है, जिससे स्टाम्प ड्यूटी और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा।
वर्तमान में, कृषि भूमि की न्यूनतम दर केवल 53 लाख रुपये प्रति एकड़ है, जबकि रिवरबेड क्षेत्रों की कीमत 17.6 लाख रुपये प्रति एकड़ तय है। नए प्रस्तावों के मुताबिक, कुछ जिलों में यह कीमत बढ़कर 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच सकती है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 1 अक्टूबर 2025 को नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद डिविजनल कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक कमेटी ने मौजूदा मूल्यांकन ढांचे की कमियों की पहचान की है।
जानिए आपके जिले के लिए क्या है प्रस्तावित रेट
प्रस्तावित बदलावों के तहत अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं, जो इस प्रकार हो सकती हैं:
- दक्षिण और नई दिल्ली: 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़।
- उत्तर, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिल्ली: 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़।
- सेंट्रल दिल्ली: 2.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़।
- शाहदरा, उत्तर-पूर्व और पूर्व दिल्ली: 2.2 करोड़ रुपये प्रति एकड़।
- दक्षिण-पश्चिम दिल्ली: 3 करोड़ से बढ़ाकर 3.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़।
- दक्षिण-पूर्व दिल्ली: 2.5 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़।
इन प्रस्तावों की समीक्षा के लिए केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के साथ बैठक की है। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार के बीच होने वाली एक विस्तृत बैठक, जो अक्टूबर में होनी थी, अब जनवरी 2027 तक के लिए टाल दी गई है। जब तक आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक ये प्रस्ताव विचारणाधीन रहेंगे।
दूसरी ओर, दिल्ली पंचायत संघ ने इस मामले में अपनी अलग मांग रखी है। संघ का कहना है कि सर्कल रेट को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने मांग की है कि जब तक नई दरें लागू नहीं हो जातीं, तब तक नई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और साल 2000 के बाद अधिग्रहित की गई जमीनों के मुआवजे की समीक्षा की जाए।