दीपक खत्री की जमानत याचिका: जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दिया समय

लॉरेंस बिश्नोई का वकील होने का दावा करने वाले दीपक नंदा उर्फ दीपक खत्री की जमानत याचिका पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने अहम फैसला लिया है। शनिवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए सोमवार तक का समय दिया है। दीपक खत्री को अवैध हथियारों की सप्लाई और जबरन वसूली से जुड़े एक गंभीर UAPA मामले में 25 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान स्पेशल जज (UAPA) किरण बंसल के सामने जांच अधिकारी पेश हुए। अधिकारी ने अदालत को बताया कि जवाब को पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (PP) के जरिए भेजा जाना था, लेकिन उनकी अनुपलब्धता के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसी वजह से पुलिस ने अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
आतंक मॉड्यूल और हथियारों की बरामदगी का मामला
यह पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस केस में अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 18 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। पुलिस ने इन आरोपियों से 33 अवैध सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल, 2 सबमशीन गन और 368 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि इन आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल सार्वजनिक समारोहों में अंधाधुंध फायरिंग कर आम जनता में दहशत फैलाने के लिए किया जाना था।
पुलिस ने खुलासा किया कि दीपक खत्री शाहबाज़ अंसारी द्वारा संचालित एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसे हर्षपाल सिंह रूबल और निशांत अरोड़ा के जरिए चलाया जा रहा था। दीपक को उस समय पकड़ा गया जब वह आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचा था। पुलिस ने उसके फोन से मिले 100 GB डेटा की जांच की और आईबी (IB) व एनआईए (NIA) ने भी उससे पूछताछ की।
इस बीच, इस केस से जुड़े दो अन्य आरोपियों, फरार शाहबाज़ अंसारी और रेहान अंसारी के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने के लिए भी आवेदन किया है। इससे पहले 5 सितंबर को कोर्ट ने जांच की जरूरत को देखते हुए दीपक खत्री और ऋषभ कपूर को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक सबूत और गवाहों के बयान उनकी संलिप्तता की ओर इशारा कर रहे थे।