बुरारी के पास यमुना में तैरती मिलीं हजारों मरी मछलियां, प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता

Kittu Kumari16 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
बुरारी के पास यमुना में तैरती मिलीं हजारों मरी मछलियां, प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता

राजधानी दिल्ली के उत्तरी इलाके बुरारी में बुधवार शाम एक दिल दहला देने वाला नजारा सामने आया, जब यमुना नदी के पानी में हजारों मछलियां मृत पाई गईं। यमुना में मरी मछलियां मिलने की इस घटना ने एक बार फिर नदी के पानी की गुणवत्ता और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना की जानकारी सबसे पहले 'न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी' ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फोटो और वीडियो साझा कर दी, जिसके बाद पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि मछलियों की इतनी बड़ी संख्या में मौत होना नदी के पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ रहे भारी दबाव का संकेत है। सोसाइटी के अनुसार, पानी में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) के स्तर में भारी गिरावट और जहरीले प्रदूषकों की मौजूदगी इस सामूहिक मृत्यु का मुख्य कारण हो सकती है। साथ ही यह संदेह भी जताया गया है कि 12 अक्टूबर को हुई एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का इस घटना से कोई संबंध तो नहीं है।

जहरीले कचरे और कम बहाव ने बढ़ाया खतरा

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राधेश्याम शर्मा ने इस स्थिति पर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि मछलियों की मौत यह दर्शाती है कि नदी में अचानक किसी जहरीले रसायन का डिस्चार्ज हुआ है। सबसे डराने वाली बात यह है कि ये रसायन जमीन के अंदर रिसकर भूजल (Groundwater) को भी प्रदूषित कर सकते हैं, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

वहीं, साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) के भीम सिंह रावत ने बताया कि यह घटना वजीराबाद के ऊपरी हिस्से में हुई है। उन्होंने कहा कि मानसून के बाद भी नदी में न्यूनतम आवश्यक बहाव नहीं रह पाता है। इस वजह से हरियाणा के करनाल और पानीपत की नहरों से आने वाला बिना उपचारित रासायनिक कचरा सीधे यमुना में मिल रहा है।

बुरारी इलाके के स्थानीय निवासियों और मछुआरों ने भी आरोप लगाया है कि हरियाणा की नहरों के जरिए औद्योगिक कचरा यमुना में बहाया जा रहा है। मछुआरों का कहना है कि ऐसी घटनाओं के कारण नदी कई महीनों तक उनके काम के लायक नहीं रहती, जिससे मजबूर होकर उन्हें पेट भरने के लिए दोबारा खेती की ओर लौटना पड़ता है।

पर्यावरणविद् फैयाज खुदसर ने एक अलग पहलू की ओर इशारा करते हुए कहा कि बादलों की वजह से धूप की कमी और रात के समय गिरते तापमान ने भी पानी में ऑक्सीजन की कमी करने में भूमिका निभाई होगी। फिलहाल, इस पूरी घटना की जांच जारी है और पानी के वैज्ञानिक विश्लेषण की मांग तेज हो गई है ताकि राजधानी के मुख्य जल स्रोत को इस स्थायी प्रदूषण से बचाया जा सके।

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