बुरारी में यमुना नदी के किनारे मिलीं हजारों मृत मछलियां, प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता

उत्तर दिल्ली के बुरारी इलाके में यमुना नदी के किनारे एक बेहद डराने वाला नजारा सामने आया है। यहां नदी के तट पर हजारों की संख्या में मृत मछलियां तैरती मिली हैं। यमुना में मछलियों की मौत की यह घटना पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि यह नदी के गिरते स्वास्थ्य और बढ़ते प्रदूषण की ओर इशारा कर रही है।
इस घटना की जानकारी 'न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी' ने दी है। सोसाइटी ने 14 अक्टूबर की शाम को इस घटना के सबूत साझा किए थे, जिसके बाद 15 अक्टूबर को नदी के किनारे भारी मात्रा में मरी हुई मछलियां देखी गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी में ऑक्सीजन की भारी कमी या किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी की वजह से यह हादसा हुआ है। कुछ आशंकाएं यह भी हैं कि 12 अक्टूबर को हुई एसिड रेन (तेजाबी बारिश) का भी इस सामूहिक मृत्यु में हाथ हो सकता है।
केमिकल वेस्ट और नालों का कहर
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हरियाणा की तरफ से नहरों के जरिए आने वाला केमिकल वेस्ट इस तबाही की मुख्य वजह है। गौरतलब है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने पहले भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को बताया था कि हरियाणा से आने वाला 'ड्रेन नंबर 8', जो बुरारी के पास यमुना में मिलता है, पानी की गुणवत्ता खराब करने का एक बड़ा केंद्र है।
यह पहली बार नहीं है जब बुरारी में ऐसा हुआ हो; इससे पहले मई 2025 में भी यहां मछलियां मरी थीं और मई 2026 में संजय झील में भी ऐसी ही घटना देखी गई थी। हालांकि हरियाणा सरकार का दावा है कि वे सीवेज और इंडस्ट्रियल वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, जो दिसंबर 2027 तक पूरे होंगे, लेकिन फिलहाल यमुना का पानी औद्योगिक कचरे और अनुपचारित सीवेज के कारण बेहद जहरीला बना हुआ है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए NGT ने पहले ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और क्षेत्रीय अधिकारियों को संयुक्त जांच करने और रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे, ताकि इस पारिस्थितिक संकट को रोका जा सके।