डीतीलए पर भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप, देव चौधरी के चयन पर होगी समीक्षा

दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ यानी डीडीसीए ने अपनी चयन नीतियों की औपचारिक समीक्षा की घोषणा की है। यह फैसला 22 साल के क्रिकेटर देव चौधरी के चयन को लेकर उपजे भाई-भतीजावाद के विवाद के बाद लिया गया है। देव चौधरी 2026 दिल्ली प्रीमियर लीग यानी डीपीएल में न्यू दिल्ली टाइगर्स टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके चयन को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी बल्लेबाजी शैली और सीमित पेशेवर रिकॉर्ड को लेकर कड़ी आलोचना हो रही है। आलोचकों का आरोप है कि उनका चयन योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत प्रभाव के जरिए हुआ है।
यह टूर्नामेंट 31 जुलाई से शुरू हुआ था और 30 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। डीपीएल के दौरान देव चौधरी के प्रदर्शन की काफी जांच-पड़ताल की गई है। उन्होंने दो मैचों में ओपनर के रूप में खेलते हुए साउथ दिल्ली सुपरस्टार्ट्स के खिलाफ दो गेंदों पर शून्य रन बनाए और वेस्ट दिल्ली Lions के खिलाफ 24 गेंदों में 16 रन बनाए। आलोचकों और कोचों ने उनकी आक्रामक शॉट खेलने में असमर्थता पर सवाल उठाए हैं। उनके फील्डिंग कौशल को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं। इन प्रदर्शनों के बाद उन्हें 24 अगस्त 2026 को टीम के 39वें मैच की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया था।
यह विवाद एक खास डीपीएल नियम की वजह से शुरू हुआ है। इस नियम के तहत आठों फ्रेंचाइजी को नीलामी के बाहर अपनी पसंद के तीन खिलाड़ियों को चुनने की अनुमति दी गई थी, बशर्ते उन्होंने कम पहले डीडीसीए लीग के कम से कम पांच मैच खेले हों। डीडीसीए एपेक्स काउंसिल के सदस्यों ने पहले ही इस नियम का विरोध किया था। एपेक्स काउंसिल के सदस्य श्याम शर्मा ने आशंका जताई थी कि व्यक्तिगत सिफारिशों के आधार पर खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। वहीं, डीडीसीए सचिव अशोक शर्मा ने पुष्टि की है कि टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद इस नियम की पूरी समीक्षा की जाएगी।
न्यू दिल्ली टाइगर्स टीम इस समय डीपीएल तालिका में सिर्फ एक जीत के साथ सबसे नीचे है। टीम ने इस मामले पर चुप्पी साधी हुई है। मुख्य कोच राजकुमार शर्मा और टीम के मालिक अजय कुमार ने इस चयन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। देव चौधरी की पेशेवर पृष्ठभूमि भी स्पष्ट नहीं है। जब इस बारे में देव चौधरी से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि मैं इन सवालों के जवाब नहीं देना चाहता।