यमुना किनारे बनेगा ग्रीन कॉरिडोर, DDA दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए तैयार कर रहा है खास प्लान
दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए DDA यमुना के किनारे 52 किमी लंबा ग्रीन कॉरिडोर बना रहा है, जिसमें साइक्लिंग और वॉकिंग ट्रैक होंगे।

दिल्ली की हवा और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाने जा रहा है। शहर में बढ़ते प्रदूषण और शहरीकरण के असर को कम करने के लिए यमुना नदी के पश्चिमी तट पर एक 'ग्रीन कॉरिडोर' विकसित किया जाएगा। इस यमुना ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य न केवल पर्यावरण की रक्षा करना है, बल्कि दिल्लीवासियों को घूमने-फिरने और सेहत सुधारने के लिए एक आधुनिक सार्वजनिक स्थान देना भी है।
इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत कुल 52 किलोमीटर लंबे साइक्लिंग और वॉकिंग ट्रैक बनाए जाएंगे। इस विशाल कार्य को तीन अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। प्रोजेक्ट के पहले चरण में ओल्ड रेलवे ब्रिज से लेकर NH-9 (पुराना NH-24) तक करीब 24 किलोमीटर के हिस्से पर काम होगा। इस शुरुआती हिस्से को तैयार करने में लगभग 16.43 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। DDA का लक्ष्य है कि पूरे 52 किलोमीटर के नेटवर्क को अगले छह से सात महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाए।
पर्यावरण और सेहत का संगम: क्या होगा खास?
इस कॉरिडोर की डिजाइन काफी खास रखी गई है। यहां 75 से 100 मीटर चौड़ा एक पब्लिक ग्रीनवे होगा, जिसे विशेष रूप से पैदल चलने वालों, साइकिल चलाने वालों और हल्के मनोरंजन की गतिविधियों के लिए डिजाइन किया गया है। इसके साथ ही, इलाके की पारिस्थितिकी (ecology) को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर बागवानी और पेड़ लगाने का काम किया जाएगा, जिससे यमुना के तटों पर हरियाली बढ़ेगी।
यह पूरी योजना दिल्ली मास्टर प्लान 2047 का हिस्सा है, जिसे 20 अगस्त 2026 को अधिसूचित किया गया था। गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रिंसिपल कमेटी से अप्रैल 2026 में मंजूरी मिली थी। विशेषज्ञों की सलाह पर कॉरिडोर के रूट में कुछ बदलाव किए गए ताकि नदी के संवेदनशील किनारों को नुकसान न पहुंचे और इसे मौजूदा तटबंधों के साथ जोड़ा जा सके।
DDA की इस कोशिश का मकसद गैर-मोटर चालित परिवहन (non-motorized mobility) को बढ़ावा देना और यमुना के बाढ़ क्षेत्रों (floodplains) को फिर से जीवित करना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ओखला बैराज और कालिंदी कुंज जैसे इलाकों में पानी की गुणवत्ता और नदी प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं।