आस्था कुंज पार्क में सुरक्षा सख्त: नाबालिग से गैंगरेप के बाद DDA ने उठाए बड़े कदम
नाबालिग से गैंगरेप के बाद DDA ने आस्था कुंज पार्क की सुरक्षा बढ़ाई है। अब यहाँ CCTV, नई लाइटें और रात में गश्त होगी।

दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में सितंबर महीने में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए गैंगरेप की दिल दहला देने वाली घटना के बाद प्रशासन अब पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इस घटना ने पार्क की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी, जिसके बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने यहाँ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के लिए कमर कसी है। अब पार्क में आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव किए गए हैं।
सुरक्षा ऑडिट के बाद DDA ने पार्क में रोशनी का खास इंतजाम किया है। यहाँ 105 नई लाइटें लगाई गई हैं और अब पार्क की सभी 340 लाइटें पूरी तरह काम कर रही हैं। अंधेरे वाले कोनों को खत्म करने के लिए हाई-मास्ट लाइटिंग लगाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इसके अलावा, निगरानी बढ़ाने के लिए चार CCTV कैमरे चालू किए गए हैं, जिनका फुटेज 15 दिनों तक सुरक्षित रखा जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर दिल्ली पुलिस इसकी मदद ले सके। पार्क की टूटी हुई बाउंड्री वॉल की मरम्मत भी पूरी कर ली गई है ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति अवैध रास्तों से अंदर न घुस सके।
गश्त और निगरानी के लिए नए नियम लागू
सिर्फ लाइटों और कैमरों से काम नहीं चलेगा, इसलिए DDA ने ग्राउंड लेवल पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को काफी सख्त कर दिया है। अब पार्क के सभी गेट लॉक किए जा सकेंगे और रात 9 बजे विकेट गेट्स बंद कर दिए जाएंगे। सुरक्षा गार्डों की तैनाती अब पूरी क्षमता के साथ होगी, जिनकी हाजिरी फिजिकल रोल कॉल और बायोमेट्रिक डैशबोर्ड सिस्टम के जरिए लगाई जाएगी।
रात के समय सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए मोटरसाइकिल, सायरन और टॉर्च से लैस कर्मियों द्वारा गश्त बढ़ाई गई है। साथ ही, साइट सुपरवाइजर और विभागीय अधिकारियों द्वारा समय-समय पर औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया जाएगा। गौरतलब है कि उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू के निर्देश पर दिल्ली के सभी 736 DDA पार्कों का सेफ्टी ऑडिट किया गया था, जिसमें आस्था कुंज सहित 190 पार्कों को 'हाई रिस्क' यानी उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रखा गया है।
इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा 24 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी की। प्रशासन अब यह सुनिश्चित कर रहा है कि रिस्पॉन्स टाइम को कम करने के लिए फील्ड स्टाफ के पास स्थानीय बीट अधिकारियों के संपर्क नंबर मौजूद हों, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।